कच्चे तेल के भाव 100 डॉलर के पार, भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर
डोनाल्ड ट्रंप की threat ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की घोषणा करके वैश्विक oil market में फिर से panic मचा दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता विफल होने के बाद कच्चे तेल के prices एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चले गए, जिससे risk में तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड ने 102.39 डॉलर प्रति बैरल का स्तर छुआ, जबकि डब्ल्यूटीआई 105 डॉलर तक पहुंच गया।
इस बढ़ते pressure के बावजूद भारत में आज फिर पेट्रोल-डीजल के rates हुआ है। दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 और डीजल ₹87.67 प्रति लीटर बिक रहा है, जबकि कोलकाता में पेट्रोल ₹104.99 और डीजल ₹91.81 प्रति लीटर है। इस अंतर का कारण local taxes और वितरण लागत है, जो उपभोक्ताओं पर direct impact डालते हैं।
सरकार ने घरेलू बाजार में ईंधन की supply बनाए रखने के लिए डीजल और एटीएफ के निर्यात पर कड़ा नियंत्रण लगा दिया है। 11 अप्रैल को डीजल पर निर्यात शुल्क 55.50 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया। इस policy का मकसद घरेलू मांग को पूरा करना और बाजार में stability बनाए रखना है।
सरकार ने यह भी स्वीकार किया है कि वैश्विक crisis के कारण कच्चे तेल के भाव में असामान्य surge आया है, लेकिन उपभोक्ताओं को इसके प्रभाव से बचाने के लिए पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है। इस decision ने लोगों को कुछ relief दी है, लेकिन आगे की स्थिति अभी अनिश्चित है।
भारत में सबसे सस्ता पेट्रोल पोर्ट ब्लेयर में ₹82.46 और डीजल ₹78.05 प्रति लीटर में मिल रहा है। यह अंतर विशेष रूप से केंद्र शासित प्रदेशों के लिए tax structure के कारण है। इसके विपरीत, कोलकाता जैसे राज्यों में उच्च वैट के कारण ईंधन की cost ज्यादा है, जो consumer burden को बढ़ाता है।
कच्चे तेल के global price वैश्विक मूल्य में उछाल हो रहा है, लेकिन घरेलू दामों में स्थिरता कैसे? सरकार के subsidy सब्सिडी के बिना यह संभव नहीं।
कोलकाता में एक लीटर पेट्रोल 105 रुपये? यह तो पहले से ही financial pressure आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने का मतलब है कि तेल के shipping route परिवहन मार्ग प्रभावित होंगे। यह बाजार के लिए बड़ा risk जोखिम है।
सरकार का move कदम डीजल निर्यात रोकने का तो सही है, लेकिन क्या यह लंबे समय तक चलेगा? export ban निर्यात प्रतिबंध से घाटा भी तो होगा।
पोर्ट ब्लेयर में पेट्रोल 82 रुपये? वहां का tax policy कर नीति वाकई फायदेमंद है।
क्या अगले महीने फिर तेल के prices दाम बढ़ेंगे? यह uncertainty अनिश्चितता लगातार बनी हुई है।