FIIs की बिकवाली के बीच ये 20 शेयर क्यों बने 'सुरक्षित ठिकाने'?
भारतीय शेयर बाजार में एक विरोधाभास चल रहा है। valuations के चलते विदेशी निवेशक बड़े पैमाने पर पैसा निकाल रहे हैं, भू-राजनीतिक तनाव और earnings ने उनका भरोसा डगमगा दिया है। 2026 की शुरुआत में FIIs ने लगभग 18 अरब डॉलर के शेयर बेच दिए। लेकिन इसी उथल-पुथल के बीच, कुछ कंपनियों पर उनका विश्वास बढ़ रहा है — ऐसा विश्वास जो चार लगातार तिमाहियों से बढ़ रहा है। ये 20 चुनिंदा शेयर उस आशा के प्रतीक हैं जो विदेशी निवेशक भारत में अभी भी देख रहे हैं।
विदेशी निवेशकों की strategy अब स्पष्ट है: पूरे बाजार को छोड़ने के बजाय, वे selective सेक्टरों में ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। digital , energy और infrastructure उनकी पसंद के क्षेत्र हैं। ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां भारत की लंबी अवधि की योजनाएं मिलती हैं और global रुझानों से जुड़ाव है। AI के चलते पूंजी के प्रवाह में बदलाव हुआ है, लेकिन भारत के इन बुनियादी क्षेत्रों में FIIs को कुछ ऐसा दिख रहा है जो बाकी बाजार में नहीं दिख रहा।
ब्लैकबक के शेयर में तो विदेशी हिस्सेदारी 11.6% से बढ़कर 32.5% हो गई — एक ऐसी छलांग जो confidence का पैमाना बन गई है। विशाल मेगा मार्ट और दक्षिण भारतीय बैंक में भी हिस्सेदारी लगभग doubled हुई है। MTAR टेक्नोलॉजीज, वारी एनर्जीज और जीई वर्नोवा जैसी कंपनियों में वृद्धि 6% से 10% के बीच रही। ये उन कंपनियों की सूची है जिनमें विदेशी धन को भारत की आर्थिक growth का विश्वसनीय साधन लग रहा है, भले ही बाजार के व्यापक आंकड़े उत्साहजनक न हों।
दूसरी ओर, सेंसेक्स और निफ्टी में 8-9% की गिरावट आई है, लेकिन midcap और smallcap शेयरों में गिरावट महज 0.5% से 1% रही। यह दिखाता है कि जहां FIIs बाहर निकल रहे हैं, वहीं domestic निवेशकों का दबदबा बढ़ रहा है। ब्रोकरेज फर्मों की ratings में कमी और oil prices में उछाल ने विदेशियों के संदेह को बढ़ाया है। लेकिन यह भी साफ है कि भारत के आर्थिक भविष्य पर सभी का ध्यान अभी टिका है।
इस संदेश का सबसे बड़ा सार यह है: आर्थिक भागीदारी में सूक्ष्मता होती है। FIIs की exit एक सामान्य रुख नहीं, बल्कि एक कैलिब्रेटेड दृष्टिकोण है। वे जहां अवसर देखते हैं, वहां गहराई से उतर रहे हैं। और जहां जोखिम लगता है, वहां से सावधानी से पीछे हट रहे हैं। यह कोई भागदौड़ नहीं, बल्कि एक गणना के आधार पर चल रहा दांव है।
18 अरब डॉलर की बिकवाली डराने वाली है, लेकिन ये 20 शेयर एक उम्मीद की किरण लग रहे हैं।
क्या घरेलू निवेशक sustain टिकाऊ तरीके से बाजार को सहारा दे पाएंगे?
ब्लैकबक में इतनी तेजी से हिस्सेदारी बढ़ना दिखाता है कि कुछ निवेशक लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बड़ा बदलाव देख रहे हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश क्यों बढ़ रहा है? क्योंकि सरकारी नीतियों का फोकस वहीं है।
HSBC और JPMorgan की डाउनग्रेड ने विश्वास पर असर डाला है, लेकिन कुछ निवेशक लंबी अवधि को देख रहे हैं।
महंगे बाजार के बीच विदेशी निवेशकों का cautious सावधान रहना समझ में आता है।
ये लेख बहुत साफ तरीके से समझाता है कि निवेश का खेल सिर्फ संख्याओं का नहीं, बल्कि रुझानों का भी है।
अगर AI वैश्विक पूंजी को खींच रहा है, तो भारत को उन सेक्टरों में भी तेजी से काम करना होगा।