आजादी के समय सभी मुसलमान पाकिस्तान चले जाते तो भारत स्वर्ग होता : गिरिराज सिंह

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सोमवार को एक विवादास्पद टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर independence के समय सभी मुसलमान पाकिस्तान चले जाते, तो भारत heaven जैसा होता। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब राजनीतिक दल महिला reservation विधेयक को लेकर आमने-सामने हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने महिलाओं के rights को छीन लिया है, जिसके बाद अब महिलाएं 'जन आक्रोश' रैली के जरिए अपना गुस्सा दिखा रही हैं।

गिरिराज सिंह ने इंडी ब्लॉक की पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस, आरजेडी, सपा और डीएमके ने विधेयक के खिलाफ जश्न मनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ये दल betrayal के मूड में हैं और जनता अब उनकी true तस्वीर पहचान चुकी है। उन्होंने कहा कि जो मुसलमान भारत में रह गए, वे 'गजवा-ए-हिंद' के विचार से प्रभावित हैं — एक ऐसा दावा जो तुरंत राजनीतिक controversy को हवा दे दिया।

उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला और कहा कि पश्चिम बंगाल की सरकार public की नहीं, बल्कि गुंडागर्दी की सरकार है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर टीएमसी के गुंडे संभल नहीं पाए, तो 4 तारीख को उनका treatment होगा — एक ऐसा बयान जो हिंसा के इशारे के तौर पर भी देखा जा रहा है। बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी महिलाओं के आक्रोश मार्च का समर्थन करते हुए कहा कि यह सिर्फ पटना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह local स्तर तक फैलेगा।

इस बीच, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उसे विधेयक का विरोध करने के लिए consequences भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के खिलाफ जनता का गुस्सा बढ़ रहा है और महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे पर उसका रिकॉर्ड अब black mark बन चुका है।

यह मुद्दा अब संसदीय बहस से आगे बढ़कर एक राष्ट्रीय political तूफान बन गया है। सत्तारूढ़ गठबंधन महिला सशक्तिकरण के नाम पर विरोध को moral अपराध बता रहा है, जबकि विपक्ष संवैधानिक संशोधन की प्रक्रिया पर अपना रुख स्पष्ट करने में जुटा है। दोनों ओर के बयान न केवल विधेयक के बारे में हैं, बल्कि एक-दूसरे की credibility को चुनौती देने का साधन भी हैं।

प्रतिक्रियाएँ 7

  • अर्पिता

    एक तरफ महिला आरक्षण की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ ऐसे divisive बयान दे रहे हैं। ये नैतिकता कहाँ की है?

  • विक्रम

    गिरिराज सिंह का बयान नफरत फैलाने वाला है। भारत की diversity ही तो उसकी ताकत है।

  • मोनिका

    अगर वाकई महिलाओं के लिए कुछ करना था, तो विधेयक के समय विपक्ष को एकजुट देखना चाहिए था। अब ये outrage दिखाने का नाटक बंद करें।

  • रोहित

    जन्नत वाला बयान सुनकर लगता है, कुछ लोग अभी भी 1947 में जी रहे हैं। वास्तविकता ये है कि भारत में सभी धर्मों के लोग हैं।

  • प्रियंका

    इलाज का धमकी भरा शब्द क्या मतलब रखता है? क्या ये threat नहीं है?

  • अमित

    टीएमसी पर गुंडागर्दी का आरोप लगाना आसान है, लेकिन क्या बीजेपी के allies वाले नेता साफ हैं?

  • सुमन

    काला धब्बा, जन आक्रोश, इलाज — ये सब rhetoric हैं। असली सवाल ये है कि महिलाओं को तुरंत आरक्षण कब मिलेगा?

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

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