महिला आरक्षण पर तेजस्वी यादव का हमला; भाजपा को दी खुली चुनौती—आंकड़े जारी करो
बिहार की राजनीति में महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा उठा है। राजद के नेता तेजस्वी यादव ने भाजपा पर direct हमला करते हुए उसे women-opposed बताया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह अपने comparative data जारी करे और इस बात को साबित करे कि महिलाओं के प्रति उसकी commitment सच्ची है।
तेजस्वी ने राजद के performance को उजागर करते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव 2024 में पार्टी ने बिहार में सबसे अधिक, 29 प्रतिशत महिलाओं को टिकट दिया। इसके अलावा राजद की लोकसभा सांसदों में 25 प्रतिशत महिलाएं हैं। विधानसभा चुनाव 2025 में भी राजद ने 17 प्रतिशत महिला उम्मीदवार उतारे, जो अन्य दलों के मुकाबले highest है।
उन्होंने विधानपरिषद में महिला representation पर भी प्रकाश डाला और कहा कि राजद के पास यह 21.4 प्रतिशत है, जो सभी दलों में सबसे ऊंचा है। तेजस्वी ने जोर देकर कहा कि बिहार की पहली और अब तक की एकमात्र महिला मुख्यमंत्री राजद से थीं, और पिछले 30 सालों में बिहार से केंद्र में महिला cabinet minister भी राजद से ही रही हैं।
इसके विपरीत, उन्होंने कहा कि भाजपा और जदयू जैसी एनडीए पार्टियों ने 75 साल में बिहार से एक भी महिला को न तो मुख्यमंत्री बनाया और न ही केंद्रीय मंत्री। इस बात पर highlighting हुए तेजस्वी ने उन पर hypocrisy का आरोप लगाया। उनका सवाल है: "ये लोग महिला उत्थान की बात कैसे कर सकते हैं?"
इस बीच, एनडीए की महिला नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत कई नेताओं ने विपक्ष के इस attack को महिलाओं का insult बताया है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आगे चलकर जनता के बीच public debate का विषय बन सकता है।
राजद 29% टिकट देता है, लेकिन क्या उन महिलाओं को actual support वास्तविक समर्थन मिलता है? टिकट देना एक बात है, लड़ाई लड़ना दूसरी।
भाजपा को pressure दबाव में लाने का ये चालाक तरीका है। आंकड़े सामने आएंगे या नहीं, लेकिन सवाल जरूर उठ गया।
बिहार में महिला मुख्यमंत्री? यादव भूल गए कि उनकी ही पार्टी की सरकार ने उस महिला नेतृत्व को undermine कमजोर कर दिया था।
राजद को महिला आरक्षण की चिंता अचानक कैसे हो गई? पहले कहां थे? ये सब political drama राजनीतिक नाटक है।
अगर आंकड़े सच हैं, तो भाजपा को answer जवाब देना होगा। बस इतना कि आंकड़े सच हों।
75 साल में एक भी महिला मंत्री नहीं? ये राष्ट्रीय शर्म नहीं तो और क्या है?