महिला आरक्षण बिल गिरा तो अपर्णा यादव ने जलाया सपा-कांग्रेस का झंडा, कहा- देश कभी माफ नहीं करेगा

लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के failure के बाद राजनीतिक तापमान चढ़ गया है। बीजेपी के तमाम नेताओं के बीच आक्रोश देखा जा रहा है, लेकिन उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव का प्रतिकार विशेष तौर पर तीखा रहा। लखनऊ की सड़कों पर उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के झंडे जलाए और इस कदम को dignity के खिलाफ बताया। उनका कहना था कि बिल के गिरने से न सिर्फ़ नीति का अवसर खोया गया, बल्कि महिलाओं के प्रति एक hostile भी सामने आई है।

अपर्णा यादव ने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में भावुकता के साथ कहा कि आज एक 'अंधेरी रात' है, जहाँ महिला सशक्तिकरण के खिलाफ राजनीति देखी गई। उन्होंने विपक्षी दलों की तुलना महाभारत के दुर्योधन और दुशासन से की और कहा कि जैसे तब द्रौपदी का अपमान हुआ, वैसी ही मानसिकता आज भी जिंदा है। उन्होंने चेतावनी दी कि country ऐसे तत्वों को कभी माफ़ नहीं करेगा।

उन्होंने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब महिला आरक्षण के proposal को रोका गया है। साल 1996, 1998, 2003 और अब 2026 में भी वही स्थिति बनी है। उनका आरोप है कि विपक्ष साधारण महिलाओं के empowerment को नहीं चाहता, बल्कि सिर्फ अपने परिवारों की महिलाओं को आगे बढ़ाना चाहता है। इस तरह की राजनीति, उनके अनुसार, समाज के लिए dangerous है।

इस प्रदर्शन में उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर झंडे जलाए और महिलाओं के rights की रक्षा के लिए मशाल जलाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रतिक्रिया किसी एक बिल से ज्यादा गहरी है — यह महिला identity और समान अवसर के लिए लड़ाई है। कार्यकर्ताओं ने solidarity दिखाते हुए नारे लगाए और आरक्षण की मांग फिर से तेज कर दी।

प्रतिक्रियाएँ 6

  • नीति_संग्राम

    ये झंडा जलाना सिर्फ राजनीतिक नाटक नहीं, बल्कि public anger का अभिव्यक्ति है। बिल टलने से महिला प्रतिनिधित्व का future अनिश्चित हो गया है।

  • सच्ची_आवाज

    विपक्ष कहता है समानता की बात, लेकिन जब मौका आता है तो block है? ये hypocrisy साफ दिख रहा है।

  • माँ_की_बेटी

    मुझे डर है कि अगर ऐसे ही रुख बने रहे तो आने वाली generation को भी इसी लड़ाई से गुजरना पड़ेगा।

  • तथ्य_चिंतक

    मशाल जलाना तो अच्छा है, लेकिन real change तभी आएगा जब विपक्ष भी इस मुद्दे पर एकजुट हो। ये सिर्फ बीजेपी का मुद्दा नहीं है।

  • राजनीति_जागृत

    अपर्णा यादव ने सही कहा — ये महिलाओं के dignity के खिलाफ है। लेकिन क्या बस प्रदर्शन काफी है? pressure बनाना जारी रखना होगा।

  • सामाजिक_सवाल

    क्या वाकई विपक्ष महिलाओं के खिलाफ है, या बस political strategy चल रही है? ये सवाल अभी भी खुला है।

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

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