होर्मुज में जिस शिप के जब्त होने से भड़का है ईरान, अब पता चला चीन ने भिजवाया था तबाही का सामान!
होर्मुज जलडमरूमध्य में एक ईरानी जहाज के जब्त होने ने क्षेत्रीय tension को फिर से बढ़ा दिया है। अमेरिकी नौसेना ने इस जहाज को तब कब्जे में लिया जब वह चेतावनी के बावजूद रुकने से इनकार कर रहा था। छह घंटे तक पीछा करने के बाद अमेरिकी सैनिकों ने जहाज के इंजन रूम पर firing की और फिर जहाज पर कब्जा कर लिया। इस घटना के बाद ईरान ने इसे 'सशस्त्र समुद्री डकैती' बताते हुए तीखी निंदा की है।
अब तक की जांच में पता चला है कि इस जहाज में मिसाइल बनाने में इस्तेमाल होने वाले chemical पदार्थ, धातुएं, पाइप और electronic parts भरे हुए थे। ये सामग्री नागरिक और सैन्य दोनों उपयोगों में काम आ सकते हैं, लेकिन अमेरिका का दावा है कि इनका उपयोग weapons में किया जा सकता था। यह जहाज चीन के बंदरगाह से निकला था और ईरान के रास्ते मलेशिया के पास रुका था।
भारतीय मूल की अमेरिकी राजनयिक निक्की हेली ने इस घटना को लेकर चीन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि चीन लगातार ईरान की सत्ता को prop up करने में मदद कर रहा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि यह घटना एक ऐसी सच्चाई है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस बीच, पाकिस्तान बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अमेरिका अभी तक जहाज के क्रू सदस्यों को छोड़ने से इनकार कर रहा है।
इस जहाज का नाम 'तोस्का' है और यह ईरान का है। अमेरिका पहले से ही इस पर हथियारों के सामान ले जाने के आरोप में sanctions लगा चुका था। जब जहाज ने रुकने के आदेश को नजरअंदाज किया, तो अमेरिकी मरीन जहाज पर चढ़ गए। घटना ने न केवल क्षेत्रीय security को चुनौती दी है, बल्कि चीन-ईरान-अमेरिका त्रिकोण में भी तनाव बढ़ा दिया है।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत ऐसे हस्तक्षेप पर हमेशा विवाद रहा है। लेकिन अमेरिका का तर्क है कि यह खेप खतरनाक थी और इसके पीछे एक बड़ी threat छिपी हो सकती थी। इस घटना से यह साफ होता है कि वैश्विक trade routes अब सिर्फ आर्थिक महत्व के नहीं, बल्कि सैन्य और राजनयिक तनाव के केंद्र भी बन रहे हैं।
अगर ये सामान वाकई हथियारों के लिए था, तो अमेरिका का response प्रतिक्रिया देना तर्कसंगत है। लेकिन क्या सबूत पर्याप्त हैं?
चीन बार-बार ऐसे मामलों में फंस रहा है। क्या वो वाकई अंतरराष्ट्रीय नियमों को ignore नजरअंदाज कर रहा है?
होर्मुज अब सिर्फ तेल के लिए नहीं, बल्कि हथियारों के लिए भी strategic रणनीतिक जगह बनता जा रहा है।
ईरान का 'समुद्री डकैती' कहना बस एक अलंकारिक भाषण है। जब नियम तोड़े जाएं, तो प्रतिक्रिया आएगी ही।
क्या पाकिस्तान की मध्यस्थता वाकई काम करेगी? ये सिर्फ diplomatic gesture राजनयिक इशारा लग रहा है।
अमेरिका ने जहाज पर गोलीबारी करके escalate तनाव बढ़ाया, लेकिन क्या वो इसके नतीजों के लिए तैयार है?
इतनी खतरनाक खेप का पता कैसे नहीं चला? क्या intelligence खुफिया जानकारी पहले से थी?