गुपचुप तरीके से ईरान को हथियार भेज रहा चीन? तेहरान में उतरे 'रहस्यमय' विमान
तेहरान में चार चीनी कार्गो विमानों के लैंड होने के बाद एक चिंताजनक pattern सामने आया है। सभी विमानों ने लैंडिंग से पहले अपने ट्रांसपॉन्डर बंद कर दिए थे, जिससे उनकी स्थिति का पता लगाना मुश्किल हो गया। यह हरकत कोई तकनीकी glitch नहीं बल्कि जानबूझकर की गई छिपी move लग रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा अक्सर तब होता है जब कोई covert operation चल रहा हो।
दावा है कि इन विमानों के जरिए चीन ईरान को हथियार पहुंचा रहा है, जो अमेरिका के साथ हाल में किए गए वादे के खिलाफ है। बीजिंग ने इस पर सफाई दी है और ऐसी report को "एकदम झूठा" बताया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि चीन ने न तो हथियार भेजे हैं और न ही ईरान को satellite help दी है।
लेकिन ट्रांसपॉन्डर बंद करने जैसी गतिविधि कोई सामान्य नहीं है। एविएशन विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का व्यवहार सुरक्षा या operational secrecy की वजह से हो सकता है। चार विमानों का एक ही route और एक जैसी छिपी गतिविधि संदेह को बढ़ाती है। इससे regional stability पर गंभीर impact पड़ सकता है।
इस बीच, अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अगर चीन ईरान को सैन्य सहायता देता है, तो परिणाम "बहुत बुरे" होंगे। पिछले हफ्ते वाशिंगटन और तेहरान ने दो सप्ताह के ceasefire की घोषणा की थी, लेकिन बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रखी है।
इस अनिश्चितता के बीच, जब होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी जहाजों के लिए खोलने की खबर आई, तो वैश्विक बाजारों में थोड़ी relief दिखी। लेकिन अगर यह खुलाव ईरान के लिए नहीं है, तो यह शांति अस्थायी हो सकती है। दुनिया अब एक ऐसे geopolitical standoff के किनारे खड़ी है, जहां एक छोटी घटना भी बड़ी conflict में बदल सकती है।
चीन कोई झूठ नहीं बोल रहा, बस उसकी diplomatic language आधिकारिक भाषा हमेशा ऐसी होती है। अगर सच में कुछ हुआ है तो वो मानेगा कैसे?
ट्रांसपॉन्डर बंद करना साधारण नहीं है। ये नागरिक उड्डयन नियम का उल्लंघन है। सिर्फ सैन्य या गुपचुप मिशन में ऐसा होता है।
बाजारों में थोड़ी relief राहत आई, लेकिन अगर नाकेबंदी जारी रही तो तेल की कीमत फिर चढ़ेगी। ये economic pressure आर्थिक दबाव सीधे आम आदमी पर पड़ेगा।
हमेशा छोटे देशों के बीच बड़े देशों के हथियार चलते हैं। चीन-अमेरिका का असली rivalry प्रतिद्वंद्विता ईरान की जमीन पर लड़ा जा रहा है।
वार्ता बिना नतीजे के खत्म हुई, अब युद्धविराम की अवधि खत्म होगी तो क्या होगा? क्या अगला escalation बढ़ता हमला इन्हीं विमानों से शुरू होगा?
सब दिखावा है। एक तरफ बातचीत, दूसरी तरफ गुपचुप हथियार। covert support छिपा समर्थन तो चल रहा है ही।