चीन ने अमेरिका द्वारा जब्त ईरानी मालवाहक जहाज को लेकर तोड़ी चुप्पी, दिया बड़ा बयान
खाड़ी के ऊपर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है, जब अमेरिका ने ओमान सागर में एक ईरानी मालवाहक जहाज को intercept लिया और बाद में उसे अपने control में ले लिया। अमेरिकी नौसेना का दावा है कि जहाज पर मिसाइल निर्माण के लिए उपयोग होने वाली chemical materials लदी हुई थी। इसी बीच, चीन ने पहली बार इस मामले पर public statement देते हुए कहा है कि उसका जहाज से कोई संबंध नहीं है।
अमेरिका की पूर्व संयुक्त राष्ट्र दूत निक्की हेली ने दावा किया कि जहाज चीन से ईरान की ओर जा रहा था और इसके जरिए चीन, ईरान की military support कर रहा है। उन्होंने इसे एक ऐसा evidence बताया जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने इन आरोपों को reject करते हुए कहा कि जहाज विदेशी झंडे के नीचे चल रहा था और चीन ऐसे दावों का सख्ती से oppose करता है।
ईरानी सेना ने इस कार्रवाई को 'समुद्री डकैती' बताया और कहा कि अमेरिका ने सीजफायर का violation किया है। उनके मुताबिक, अमेरिकी सैनिकों ने जहाज के नौवहन उपकरणों को destroy कर दिया और उस पर कब्जा कर लिया, जो एक स्पष्ट आक्रामकता थी। ईरान ने चेतावनी दी है कि वह इसका retaliatory response देगा।
इस पूरे मामले में चीन की भूमिका पर विशेष नजर है। इससे पहले चीन ने ईरान को defense और उपग्रह सहायता देने से इनकार किया था। अमेरिकी प्रशासन ने लगातार चीन पर ईरान को हथियार आपूर्ति करने के आरोप लगाए हैं और इसके लिए sanctions लगाने की धमकी भी दी है। चीन का कहना है कि वह military exports में हमेशा जिम्मेदारी से काम करता है और अंतर्राष्ट्रीय नियमों का पालन करता है।
इस घटना ने खाड़ी में भू-राजनीतिक tensions को फिर से बढ़ा दिया है। अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर नियंत्रण की struggle , सैन्य जांच और आपूर्ति श्रृंखला के security पहलू अब गहरी चिंता का विषय बन गए हैं। जैसे-जैसे घटना के बारे में अधिक जानकारी सामने आ रही है, वैसे-वैसे global reaction भी तेज होती जा रही है।
अगर जहाज विदेशी झंडे के नीचे था, तो फिर अमेरिका को jurisdiction अधिकार कैसे मिला उसे रोकने का? यह बहुत सवाल खड़े करता है।
चीन हर जगह से निरस्त दावा कर रहा है, लेकिन दुनिया जानती है कि वास्तविकता क्या है।
ईरान के लिए यह सिर्फ एक जहाज नहीं, बल्कि संप्रभुता का सवाल है।
अमेरिका कहता है 'हम शांति चाहते हैं', लेकिन जहाज पर गोलीबारी करता है। hypocrisy द्वैत बहुत साफ है।
अगर रासायनिक सामग्री वाकई मिसाइल बनाने के लिए थी, तो क्या arms control हथियार नियंत्रण समझौते अब बस कागज के टुकड़े हैं?
इस पूरे मामले में transparency पारदर्शिता कहाँ है? सब अपना-अपना कह रहा है।