ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोला, तेल कीमतों में गिरावट
ईरान ने घोषणा की है कि व्यावसायिक जहाजों के लिए स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पूरी तरह खोल दिया गया है। यह दुनिया का सबसे संवेदनशील तेल मार्ग है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि युद्धविराम की बची अवधि तक यह रास्ता सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए fully open रहेगा। इस ऐलान के तुरंत बाद कच्चे तेल की कीमतें तेजी से गिर गईं, जिससे बाजारों में राहत की लहर दौड़ गई।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा के कुछ मिनट बाद ही स्पष्ट किया कि अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी बरकरार रहेगी। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यह नाकाबंदी सिर्फ ईरान पर लागू होगी, जब तक कि दोनों देशों के बीच समझौता 100 फीसदी पूरा नहीं हो जाता। यह विरोधाभासी stance अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भ्रम पैदा कर रही है। ईरान के सरकारी टीवी ने एक सैन्य अधिकारी के हवाले से कहा कि सैन्य जहाजों का आवागमन अभी भी banned रहेगा, और व्यावसारिक जहाजों को भी निर्धारित मार्ग से आने की permission लेनी होगी।
तेल बाजारों में तेजी से reaction देखी गई। ब्रेंट क्रूड की कीमत 98 डॉलर से गिरकर 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई। अमेरिकी लाइट स्वीट क्रूड में भी significant drop आई। इसके असर से यूरोप और अमेरिका के शेयर बाजारों में उछाल आया। पेरिस और फ्रैंकफर्ट के बाजार दो फीसदी से अधिक ऊपर गए, जबकि डॉव और एसएंडपी में भी स्पष्ट gains दर्ज किए गए। यह संकेत है कि निवेशक risk कम होने की उम्मीद कर रहे हैं।
लेकिन शिपिंग कंपनियां अभी भी सतर्क हैं। स्टेना बल्क जैसी कंपनियों ने कहा है कि वे safety को तब तक प्राथमिकता देंगे, जब तक उन्हें पूरा confidence नहीं होता कि स्थिति सामान्य है। एक अन्य कंपनी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि वे होर्मुज़ से गुजरने वालों में पहले नहीं होंगे। वे अनावश्यक जोखिम नहीं लेना चाहते। इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) ने कहा कि वह ईरान की घोषणा की जांच कर रहा है कि क्या यह free passage और अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार है।
इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि तनाव अभी भी बना हुआ है। युद्धविराम जारी है, लेकिन दोनों ओर की military presence अभी भी तीव्र है। ईरान का कदम अंतरराष्ट्रीय pressure के बीच एक राजनयिक संकेत लगता है, लेकिन अमेरिका की नाकाबंदी जारी रखने की धमकी ने स्थिति को जटिल बना दिया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि रणनीतिक बिंदुओं पर नियंत्रण का मतलब ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक stability पर सीधा असर होता है।
कीमतें तो गिरी हैं, लेकिन अगले हफ्ते फिर बढ़ जाएंगी अगर ये नाकाबंदी वाली बात गंभीर हो गई। market reaction बाजार प्रतिक्रिया तो तुरंत होती है, लेकिन वास्तविक supply chain आपूर्ति श्रृंखला पर असर बाद में दिखेगा।
ट्रंप ने धन्यवाद तो दिया, लेकिन फिर नाकाबंदी जारी रखने की बात करके अपनी true stance वास्तविक मुद्रा दिखा दी। यह सिर्फ दिखावा है।
होर्मुज़ के बिना तेल का आयात-निर्यात बंद हो जाएगा। यहां के तनाव से global economy वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी, हम सबके बजट पर direct impact सीधा असर पड़ेगा।
IMO क्या कर सकता है? बस बयान जारी करेगा। वास्तविक ताकत तो अमेरिका और ईरान के हाथ में है।
शिपिंग कंपनियों का cautious approach सावधान दृष्टिकोण समझने योग्य है। एक जहाज के नुकसान का मतलब करोड़ों का नुकसान। safety first सुरक्षा पहले।
क्या ईरान वाकई चाहता है कि यह रास्ता खुला रहे? या बस अंतरराष्ट्रीय pressure दबाव में एक बयान दे दिया? जब तक नौसैनिक नाकाबंदी जारी है, free movement आजाद गति कैसे संभव है?