बांका में एचपीवी टीकाकरण अभियान धीमा, डेढ़ महीने में 1041 किशोरियों को दी गई वैक्सीन

बांका जिले में एचपीवी टीकाकरण अभियान अपने लक्ष्य से काफी पीछे चल रहा है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस life-saving initiative के तहत अब तक केवल 1,041 adolescent girls को ही vaccine दी जा सकी है, जबकि अगले 90 दिनों में 22,362 लड़कियों का टीकाकरण करने का target तय किया गया था। यह आंकड़ा दिखाता है कि अभियान की pace आधी से भी कम है, जो सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, प्रतिदिन 448 लड़कियों का टीकाकरण करने का goal है, लेकिन गुरुवार को केवल 237 को वैक्सीन दी गई। अधिकारियों का मानना है कि जागरूकता की कमी और अभिभावकों में hesitation मुख्य बाधा है। कई माता-पिता अभी भी यह समझ नहीं पाए हैं कि यह preventive measure उनकी बेटियों के भविष्य के स्वास्थ्य के लिए कितना महत्वपूर्ण है।

प्रखंडवार आंकड़े बताते हैं कि धोरैया सबसे आगे है, जहां 181 किशोरियों को वैक्सीन लग चुकी है, जबकि बांका सदर सबसे पीछे है, जहां केवल 60 लड़कियों का ही टीकाकरण संभव हो पाया है। इस असमानता के पीछे स्थानीय outreach और community engagement की कमी शामिल हो सकती है। अन्य प्रखंडों का प्रदर्शन भी मिश्रित है, जो दर्शाता है कि consistent effort की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, एचपीवी infection सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण है। समय पर टीकाकरण न होने से महिलाओं में इस गंभीर बीमारी का risk कई गुना बढ़ जाता है। गार्डासिल वैक्सीन से शरीर में वायरस के खिलाफ immunity विकसित होती है, जो जोखिम को काफी हद तक कम कर सकती है।

टीकाकरण अभियान को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और पंचायतों पर awareness campaign चलाने की आवश्यकता बताई है। शिक्षकों, आशा कार्यकर्ताओं और जीविका दीदियों के माध्यम से घर-घर जाकर अभिभावकों की doubts को दूर करना जरूरी है। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. सुनील चौधरी ने कहा कि आने वाले दिनों में गांव और मोहल्ला स्तर तक special drive चलाकर लक्ष्य को हर हाल में पूरा किया जाएगा।

प्रतिक्रियाएँ 6

  • नीतू_बांका

    हमारे यहां स्कूल में बच्चियों को तो बुलाया गया था, लेकिन parents डर रहे थे। कह रहे थे कि वैक्सीन से fertility पर असर पड़ेगा। ये गलत धारणा जड़ से निकालनी होगी।

  • डॉ_मिश्रा

    जोखिम को कम करने के लिए preventive healthcare सबसे अहम है। एक बार बीमारी हो जाए, तो treatment cost और दर्द दोनों बहुत बढ़ जाते हैं।

  • सुधीर_जी

    अभियान तेज करने के लिए सिर्फ नारे काफी नहीं हैं। ground workers को अधिक संसाधन और training चाहिए।

  • प्रियंका_एएनएम

    हम दीदियों को तो हर घर जाना होता है, लेकिन कई बार community leaders भी सहयोग नहीं करते।

  • राजेश_कुमार

    अगर लक्ष्य 22 हजार है और अब तक 1000 भी नहीं हुए, तो फिर अगले 90 दिनों में ये कैसे पूरा होगा? realistic target तय करने की जरूरत थी।

  • मीना_दीदी

    मैंने अपनी बेटी को वैक्सीन दिलवाई। डॉक्टर ने समझाया कि ये safe है और effective भी। अब दूसरों को भी जागरूक कर रही हूं।

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

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