ईरान: युद्ध के क्रूर परिणाम भुगतने को मजबूर लाखों नन्ही ज़िन्दगियाँ
ईरान में लाखों children अब युद्ध के भयावह consequences का सामना कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने चेतावनी दी है कि स्कूलों, घरों और स्वास्थ्य सुविधाओं पर हमलों के बाद बच्चे न केवल शारीरिक injuries से जूझ रहे हैं, बल्कि डर, अनिश्चितता और मानसिक stress से भी घिरे हैं। ऐसे में उनके भविष्य, शिक्षा और समग्र well-being पर गहरा संकट मंडरा रहा है।
स्वास्थ्य सेवाएँ अब चरम pressure में हैं। देशभर में 442 स्वास्थ्य सुविधाओं के नुकसान के बाद लगभग एक करोड़ लोगों—जिनमें 22 लाख children शामिल हैं—को जरूरी इलाज तक पहुँच नहीं है। ईरान का प्रमुख वैक्सीन उत्पादन केंद्र, पाश्चर संस्थान, क्षतिग्रस्त हो चुका है। अब जीवनरक्षक vaccines का उत्पादन ठप है, जिससे बीमारियों के फैलने का risk बढ़ गया है।
इसके अलावा, कैंसर जैसी बीमारियों की दवाएँ बनाने वाली तोफ़ीग दारौ कंपनी पूरी तरह नष्ट हो गई है। इससे गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों, खासकर बच्चों, के लिए life-saving treatment अब लगभग असंभव हो गए हैं। स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे के इतने भारी नुकसान ने न केवल अस्पतालों को, बल्कि बच्चों के भरोसे के पूरे system को ही डगमगा दिया है।
शिक्षा का भविष्य भी खतरे में है। 760 से अधिक स्कूल नष्ट या क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। युद्ध के पहले दिन एक स्कूल पर मिसाइल हमले में 168 लड़के-लड़कियों की मौत हो गई। बच्चों के लिए सुरक्षित spaces , जैसे स्कूल और समुदाय केंद्र, अब खतरे के घेरे में हैं। बच्चे न केवल शिक्षा से वंचित हैं, बल्कि घरों से displaced भी हो रहे हैं।
यह संकट सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है। बहरीन, इसराइल, जॉर्डन, कुवैत और लेबनान में भी बच्चे मारे गए और घायल हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून नागरिक बुनियादी ढाँचे पर हमलों को सख्ती से prohibits करता है, क्योंकि जल और बिजली की आपूर्ति बाधित होने से नवजात बच्चों सहित कमजोर वर्गों के लिए खतरा और बढ़ जाता है। बच्चों का जीवन अब राजनीतिक conflict की भेंट चढ़ रहा है।
एक स्कूल पर 168 बच्चों की मौत? यह तो मानवता के खिलाफ अपराध है। कोई भी conflict संघर्ष इतनी बर्बरता को नहीं सही ठहरा सकता।
टीकों के उत्पादन बंद होने से नए संक्रमण का risk खतरा तो बढ़ेगा ही, लेकिन क्या अन्य देश तुरंत टीके भेजने के लिए तैयार हैं? मानवीय सहायता अब तत्काल जरूरत है।
कैंसर के मरीज बच्चे दवाओं के लिए तड़प रहे होंगे। यह सोचकर दिल टूट जाता है कि उनकी treatment उपचार योजना बिखर गई है।
स्कूल तोड़ना सिर्फ इमारत गिराना नहीं, भविष्य तोड़ना है। यह नई पीढ़ी के साथ injustice अन्याय है।
इतने बच्चे displaced विस्थापित, इतने अस्पताल बंद… क्या सुरक्षा परिषद अब भी चुप रहेगी? अंतरराष्ट्रीय कानून का क्या होगा?
युद्ध के दौरान बुनियादी ढाँचे पर हमला करना निष्ठुर है। बिजली नहीं होगी तो नवजात इकाइयाँ कैसे चलेंगी? यह तो नागरिक बुनियादी ढाँचे के खिलाफ जानबूझकर हमला है।