'इन लोगों ने महिलाओं का अधिकार रोका..', INDI गठबंधन पर मनोज तिवारी का प्रहार
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने नारी शक्ति वंदन बिल के विफल होने के लिए विपक्षी दलों पर sharp criticism दी है। उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी यानी महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला बिल विपक्ष के विरोध के कारण पास नहीं हो पाया। तिवारी ने एक वीडियो संदेश के जरिए यह बात कही, जिसमें उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया।
तिवारी ने बताया कि 2023 में यह बिल सभी दलों के समर्थन के साथ पास हुआ था, लेकिन अब जब constitutional amendment की आवश्यकता पड़ी, तो विपक्षी गठबंधन INDI ने समर्थन वापस ले लिया। वे बोले, "जब लागू करने का समय आया, तो ये दल पीछे हट गए।" उन्होंने दावा किया कि इस बिल को रोकने के बाद विपक्षी नेताओं ने celebration मनाया, जैसे उन्हें बड़ी जीत मिल गई हो।
उन्होंने विशेष रूप से कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी, डीएमके, टीएमसी और एनसीपी पर महिला विरोधी posture अपनाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि ये पार्टियां अधिकारों के इनकार के जरिए महिलाओं के साथ छल कर रही हैं। तिवारी ने जोर देकर कहा कि देश की माताएं-बहनें इस घटना को कभी नहीं भूलेंगी।
इस बीच, तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के प्रति विश्वास जताते हुए कहा कि भाजपा सरकार महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पिछले 40 सालों में कोई भी सरकार इस काम को पूरा नहीं कर पाई, लेकिन मोदी सरकार ने इसे संभव बनाया। उन्होंने वादा किया कि जब भी सत्ता में वापसी होगी, वे rights जरूर दिलाएंगे।
तिवारी ने सवाल उठाया कि जब अमित शाह ने महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की बात की, तो विपक्ष क्यों पीछे हट गया"? उन्होंने कहा कि असली इरादा महिलाओं को सशक्त बनाने का होना चाहिए, न कि राजनीतिक खेल। उनका संदेश स्पष्ट था: देश देख रहा है, और महिलाएं याद रखेंगी।
इतने सालों बाद महिलाओं को आरक्षण मिलने वाला था, लेकिन विपक्ष ने blocked रोक दिया। ये निराशाजनक है।
तिवारी सही कह रहे हैं। विपक्ष हर बार rights अधिकार देने से पहले राजनीति करता है।
क्या वाकई विपक्ष महिलाओं के खिलाफ है? या भाजपा सिर्फ blame game आरोप लगा रही है?
50 प्रतिशत की बात करो, लेकिन पहले 33% को भी पास नहीं होने दिया। hypocrisy पलटन साफ है।
महिलाओं के लिए आरक्षण जरूरी है। लेकिन अब सवाल ये है कि अगले चुनाव में public आम जनता कैसे प्रतिक्रिया देगी।
तिवारी का तेवर देखकर लगता है कि भाजपा इस मुद्दे को election campaign चुनावी मुद्दा बनाने जा रही है।