राहुल गांधी को 'दोहरी नागरिकता' मामले में बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने लगाई FIR पर रोक
राहुल गांधी को case में कानूनी relief मिली है, जहाँ उनके खिलाफ 'दोहरी नागरिकता' को लेकर एफआईआर दर्ज करने के आदेश को court ने अस्थायी रूप से रोक दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उन्हें आरोपों के खिलाफ अपना response रखने का अधिकार देने की बात पर जोर दिया, जो न्यायिक fairness के सिद्धांत पर आधारित है।
यह ruling कर्नाटक के बीजेपी कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की याचिका के संदर्भ में आया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी के पास ब्रिटेन की citizenship है — एक ऐसा दावा जो भारतीय कानून के तहत illegal है। पहले लखनऊ की एमपी/एमएलए कोर्ट ने इस शिकायत को खारिज कर दिया था, जिसके बाद शिशिर ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने reference दिया जगन्नाथ वर्मा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2014) के मामले का, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि किसी suspicious case में निर्णय लेने से पहले व्यक्ति को सुना जाना necessary है। यह निर्देश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत लागू हुआ, जिसने राहुल गांधी को अगली सुनवाई तक protection दी।
अब next hearing 20 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है, जिसके बाद ही अदालत यह तय करेगी कि क्या एफआईआर दर्ज की जाए। इस delay ने राजनीतिक माहौल में tension को कम करने का काम किया है, लेकिन यह भी स्पष्ट कर दिया है कि न्यायिक process को राजनीतिक आरोपों से ऊपर रखा जाना चाहिए।
अगर citizenship नागरिकता का मामला था, तो पहले क्यों नहीं उठाया गया? अब चुनावों के पास आते-आते ये कार्रवाई?
कोर्ट ने सही किया। कानूनी प्रक्रिया को बरकरार रखना जरूरी है, चाहे व्यक्ति कोई भी हो।
ये temporary relief अस्थायी राहत है। 2026 तक कई राजनीतिक changes बदलाव आ सकते हैं।
देखते हैं क्या evidence सबूत मिलते हैं। अभी तक केवल allegations आरोप हैं, कोई ठोस दस्तावेज नहीं।
जगन्नाथ वर्मा केस का reference हवाला बहुत समय से मांगा जा रहा था। खुश हूँ कि अदालत ने इसे गंभीरता से लिया।
क्या political pressure राजनीतिक दबाव इस तरह के मामलों को प्रभावित करता है? ऐसा लगता है कि कुछ मामले तेजी से चलते हैं, कुछ में देरी।