भारत अमेरिका ट्रेड डील पर अब तक की सबसे बड़ी खबर: पीयूष गोयल ने कहा
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहे trade deal पर अब तक की सबसे स्पष्ट प्रगति हुई है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने घोषणा की है कि समझौते का पहला हिस्सा लगभग अंतिम रूप ले चुका है। अधिकारियों की एक टीम वॉशिंगटन में तीन दिन की वार्ता में शामिल हो रही है, जहाँ अंतरिम समझौते के framework पर विस्तृत चर्चा हो रही है।
इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगे कुछ tariff में कमी की सहमति दी थी, जिसमें रूस से तेल आयात पर लगे 25 प्रतिशत के शुल्क को हटाना और शेष 25 प्रतिशत को 18 प्रतिशत तक घटाना शामिल था। यह change भारतीय निर्यात के लिए एक बड़ा फायदा साबित हो सकता है, खासकर जब भारत अमेरिकी बाजार में अपने प्रतिस्पर्धियों पर advantage बनाने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि, फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने समझौते की प्रक्रिया में देरी पैदा कर दी। कोर्ट ने ट्रंप युग के reciprocal tariff को चुनौती दी, जिसके बाद अमेरिका ने सभी देशों पर 10 प्रतिशत की सामान्य दर से import duty लगाने की घोषणा की। इस कारण मुख्य वार्ता स्थगित हो गई, लेकिन अब बातचीत फिर से तेज हो गई है।
इस बीच, आर्थिक प्रतिस्पर्धा का नक्शा भी बदल रहा है। 2025-26 में चीन ने अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा trade partner बनने का दावा किया है। यह एक महत्वपूर्ण विकास है, क्योंकि अमेरिका 2024-25 तक लगातार चार साल तक इस स्थान पर रहा था। ऐसे में भारत-अमेरिका negotiation का दबाव और बढ़ गया है, ताकि द्विपक्षीय संबंधों में नई ऊर्जा आ सके।
अमेरिका के साथ यह deal समझौता भारत के लिए बहुत जरूरी है, खासकर जब चीन आगे निकल रहा है।
क्या वाकई अमेरिका टैरिफ कम करेगा, या फिर यह सिर्फ एक political statement राजनीतिक बयान है? पिछले वादे तो अक्सर टूटे हैं।
अगर भारत को अमेरिकी बाजार में better access बेहतर पहुंच मिलती है, तो छोटे निर्यातकों को भी फायदा होगा।
चीन का भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर बनना चिंता की बात है। हमें अमेरिका के साथ strong agreement मजबूत समझौते की जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिका का 10% शुल्क लगाना दिखाता है कि वहाँ की policy नीति कितनी अस्थिर है।
क्या भारत वास्तव में अपने प्रतिस्पर्धियों पर competitive edge प्रतिस्पर्धात्मक लाभ हासिल कर पाएगा? सवाल अभी भी खुला है।
वॉशिंगटन में तीन दिन की वार्ता में सिर्फ technical details तकनीकी विवरण पर चर्चा हो रही है, जो अच्छा संकेत है।
अंतरिम समझौता एक शुरुआत है, लेकिन हमें long-term strategy दीर्घकालिक रणनीति के बारे में भी सोचनी चाहिए।