हिमाचल में शिक्षा सुधार: 75 से कम छात्रों वाले 10 कॉलेज का होगा विलय, सुक्खू सरकार का बड़ा निर्णय
हिमाचल प्रदेश सरकार ने शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए big decision लेते हुए 75 से कम छात्रों वाले लगभग दस कॉलेजों के merger की घोषणा की है। यह कदम संसाधनों के better use और शिक्षकों की availability को बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है। फिलहाल सरकार की नजर पहले चरण में उन संस्थानों पर है जहां छात्र संख्या इस सीमा से कम है, खासकर जो जिला मुख्यालय से दूर स्थित हैं।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया और आगे की कार्रवाई के लिए फाइल उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत शर्मा को भेज दी गई है। विलय के बाद, जिन संस्थानों में काम कर रहे teachers और गैर-शिक्षक कर्मचारी हैं, उनका transfer दूसरे कॉलेजों में किया जाएगा। इससे शैक्षणिक quality में सुधार की उम्मीद है।
छात्रों की पढ़ाई में बाधा न आए, इसके लिए सरकार ने विशेष व्यवस्था की है। जो छात्र जिला मुख्यालय के कॉलेज में दाखिला लेंगे, उन्हें monthly 5,000 रुपये का stipend दिया जाएगा। जो छात्र वहां नहीं पढ़ना चाहते, उनका दाखिला निकट के कॉलेजों में करवाया जाएगा। इससे education की निरंतरता सुनिश्चित होगी।
प्रभावित कॉलेजों में टिक्कर (6), कुपवाड़ा (53), ननखड़ी (66), संधोल (38), कोटली (70), हरिपुर गुलेर (32), मुल्थान (59), भलेई (19), जयनगर (68) और कुकुमसेरी (40) शामिल हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि हरिपुर गुलेर कॉलेज को fine arts कॉलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। यह दर्शाता है कि सरकार केवल बंद करने की नीति नहीं, बल्कि पुनर्गठन और upgrade की दिशा में भी काम कर रही है।
इस पहल के पीछे का तर्क यह है कि छोटे कॉलेजों में resources का बहुत बड़ा waste होता है। एक छात्र को संचालित करने की लागत अत्यधिक हो जाती है। इससे न केवल public funds का नुकसान होता है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी उपलब्ध नहीं हो पाती। 2023 में 19 कॉलेजों को डिनोटिफाई करने के बाद यह अब एक और बड़ा कदम है।
नए सत्र से कॉलेजों में semester system भी लागू की जाएगी, जो education reform के व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाती है। सरकार का लक्ष्य 100 से कम छात्र वाले सभी कॉलेजों को अंततः मर्ज करने का है, लेकिन यह एक चरणबद्ध दृष्टिकोण है। छात्रों और स्थानीय समुदायों पर इसके impact को लेकर चर्चा जारी है।
अगर छात्र बहुत कम हैं तो विलय तर्कसंगत है, लेकिन क्या remote areas दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों को वास्तव में यह स्टाइपेंड पर्याप्त होगा? यातायात और रहने के cost लागत बहुत ज्यादा है।
यह सरकार का असली policy change नीतिगत बदलाव है। पहले बस नए कॉलेज खोल दिए जाते थे बिना योजना के। अब proper planning उचित योजना दिख रही है।
हरिपुर गुलेर को फाइन आर्ट कॉलेज बनाना अच्छा कदम है। इससे local talent स्थानीय प्रतिभा को मौका मिलेगा। लेकिन क्या infrastructure बुनियादी ढांचा तैयार है?
कर्मचारियों के बदले की बात तो ठीक है, लेकिन अगर उन्हें बहुत दूर भेज दिया गया तो यह practical issue व्यावहारिक समस्या बन सकता है।
इस तरह के reforms सुधार तभी सफल होंगे जब नए कॉलेजों में शिक्षक quality teaching गुणवत्तापूर्ण शिक्षण देंगे। बस भवन और नाम बदलने से कुछ नहीं होगा।
मुझे लगता है कि सरकार को पहले स्टाइपेंड की रकम बढ़ानी चाहिए। 5000 रुपये today's economy आज की अर्थव्यवस्था में कुछ खास नहीं है।