प्लीज इन्हें नुकसान मत पहुंचाएं', डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से आठ महिलाओं की रिहाई की अपील की, शेयर की तस्वीरें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से the women को फांसी न देने की गुजारिश की है, जिन्हें जनवरी के protests के दौरान गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर आठ महिलाओं की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, 'प्लीज इन्हें नुकसान मत पहुंचाना।' ट्रंप ने कहा कि वह ईरानी नेताओं से directly बातचीत करेंगे और उनसे अपील करेंगे कि वे इनकी release कर दें। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा करने से द्विपक्षीय संबंधों के लिए positive संकेत जाएगा।
दावा किया जा रहा है कि ईरान की अदालतों ने इन महिलाओं को execution की सजा सुनाई है, लेकिन इसकी independent verification नहीं हुई है। बीबीसी के अनुसार, ईरान के अटॉर्नी जनरल ने ऐसी खबरों को false बताया है। फिर भी, ट्रंप की अपील ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर मामले को global attention दिलाया है। यह पोस्ट अयाल याकोबी नामक एक व्यक्ति द्वारा बनाई गई थी, जिसे ट्रंप ने amplified दिया।
इन आठ महिलाओं में से कुछ के खिलाफ विद्रोह भड़काने या public demonstrations में शामिल होने के आरोप हैं। गोलनाज नराघी, जो एक आपातकालीन चिकित्सा विशेषज्ञ हैं, जनवरी से जेल में हैं। वहीं, बीता हेम्मती और वीनस हुसैन नेजाद को विरोध के आरोप में गिरफ्तार किया गया। ये सभी महिलाएं ईरान में महिला अधिकारों और political freedom के लिए उठ रही आवाजों का प्रतीक बन गई हैं।
इस घटना ने ईरान और पश्चिम के बीच चल रहे tensions पर एक बार फिर रौशनी डाली है। यद्यपि ट्रंप प्रशासन ने अभी तक औपचारिक रूप से कोई diplomatic intervention नहीं किया है, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए उठाया गया यह मुद्दा एक soft pressure के रूप में देखा जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से चुप्पी के बीच यह अपील एक moral appeal के रूप में सामने आई है। कई लोगों का मानना है कि यह कदम राजनीतिक posturing के रूप में भी हो सकता है।
अगर वाकई फांसी का खतरा है, तो ये human rights मानवाधिकार का मुद्दा है। लेकिन क्या ट्रंप वाकई चिंतित हैं, या बस ध्यान खींचने की कोशिश?
अमेरिका हमेशा चुनिंदा आक्रोश दिखाता है। दूसरे देशों में महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर चुप क्यों रहते हैं?
गोलनाज नराघी की तस्वीर देखकर दिल टूट गया। एक डॉक्टर को इस तरह जेल में डालना unjust अन्याय है।
ट्रंप का amplifying बढ़ावा देना बुद्धिमत्तापूर्ण है। इससे ईरान पर अंतर्राष्ट्रीय scrutiny निगरानी बढ़ेगी।
अगर ये खबर गलत है, तो ट्रंप को fact-check तथ्य-जांच क्यों नहीं करनी चाहिए थी पहले?
ईरान में महिलाओं के खिलाफ कानून हमेशा से कठोर रहे हैं। ये मामला उसी प्रणालीगत उत्पीड़न का हिस्सा है।
देखते हैं क्या इस appeal अपील का कोई असर होता है। अभी तक तो ईरान ने कोई response प्रतिक्रिया नहीं दी।