शरीर के इन 6 अंगों में सबसे पहले कैंसर क्यों होता है? WHO की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
कैंसर की रफ्तार दुनिया भर में डराने वाली है, और एक नई WHO report ने उन छह अंगों को सामने रखा है जहां यह सबसे पहले और सबसे ज्यादा दस्तक देता है। भारत में भी इनमें से कई मामले लगातार बढ़ रहे हैं। यह बीमारी अनियंत्रित कोशिका विभाजन से शुरू होती है, जिसमें शरीर के सेल्स बिना रोक-थाम के बढ़ने लगते हैं और आसपास के ऊतकों को नुकसान पहुंचाते हैं। यह जानलेवा रोग कई कारणों से होता है—smoking , pollution , वायरल infections , उम्र और पारिवारिक इतिहास।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, breast , lung , colorectal (आंत), prostate , liver और stomach के कैंसर दुनिया भर में सबसे आम हैं। इनमें से हर एक अंग की कोशिकाएं ऐसे माहौल में रहती हैं जहां बदलाव होने की risk अधिक होती है। फेफड़ों का कैंसर तंबाकू और धुएं के संपर्क में लंबे समय तक रहने से होता है, जबकि स्तन कैंसर हार्मोनल गतिविधि के चलते हो सकता है।
कोलोरेक्टल कैंसर आंतों की लाइनिंग में शुरू होता है, जहां कोशिकाएं लगातार नई होती रहती हैं—इसी constant renewal के कारण जोखिम बढ़ जाता है। प्रोस्टेट कैंसर ज्यादातर बुजुर्ग पुरुषों में देखा जाता है, जबकि यकृत कैंसर लंबे समय तक वायरल संक्रमण या रासायनिक उत्तेजकों के संपर्क में रहने से पैदा होता है। पेट का कैंसर खान-पान और हेलिकोबैक्टर पाइलोरी संक्रमण से घनिष्ठ रूप से जुड़ा है।
डॉक्टरों के अनुसार, जीवनशैली में simple change जोखिम को काफी कम कर सकते हैं। तंबाकू से बचना, कम शराब पीना, प्रसंस्कृत मांस की जगह सब्जियों और फलों को अपनाना, और नियमित व्यायाम जैसे कदम लंबे समय तक स्वस्थ रहने में मदद करते हैं। टीकाकरण भी एक महत्वपूर्ण हथियार है—हेपेटाइटिस B और HPV के टीके कुछ कैंसरों को शुरू होने से रोक सकते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात: early detection इलाज की संभावना को बढ़ाता है। जहां तक हो सके, सार्वजनिक screening programs में भाग लें और नियमित जांच करवाएं। कैंसर से डरने के बजाय, उसके खिलाफ informed action उठाना ज्यादा उपयोगी है।
पेट का कैंसर तो मेरे चाचा को भी हुआ था... लगातार जलन और खाना हजम न होने पर भी डॉक्टर के पास नहीं गए। early detection जल्द पता चलना जान बचा सकता है।
हमारे यहां तो स्तन कैंसर के मामले बहुत बढ़ रहे हैं। कई लोग social stigma सामाजिक लेबल के डर से जांच नहीं करवाते।
धूम्रपान छोड़ने के बाद फेफड़ों की recovery बहाली कितनी तेजी से होती है? क्या जोखिम तुरंत कम हो जाता है?
ये सब सुनकर लगता है कि risk खतरा बस अमीर देशों का है, लेकिन भारत में भी ये अंग लगातार निशाने पर हैं।
हमारे घर में तो प्रोस्टेट कैंसर का इतिहास है। अब पापा हर साल screening स्क्रीनिंग करवाते हैं। बस डर लगता रहता है।
WHO की रिपोर्ट ठीक है, लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचा गांवों में कब तक नहीं पहुंचेगा? जागरूकता बढ़ेगी तो क्या फायदा अगर जांच न हो सके?