पाकिस्तान में वार्ता फेल होने के बाद पीएम मोदी और ट्रंप के बीच 40 मिनट की अहम बातचीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बुधवार को लगभग 40 मिनट तक फोन पर बातचीत हुई, जो पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच विफल शांति वार्ता के तुरंत बाद हुई। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि यह बातचीत highly important है, क्योंकि क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ रहा है। यह इस साल दोनों नेताओं के बीच तीसरी बातचीत है, और पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद दूसरी।
ट्रंप ने मोदी को पश्चिम एशिया की ताजा situation के बारे में अपडेट किया, जिसमें ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी blockade भी शामिल है। अमेरिकी राजदूत ने कहा कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहित कई big deals अपेक्षित हैं। मोदी ने ट्रंप से कहा, ‘मैं सिर्फ यही चाहता हूं कि आप जान लीजिए कि हम सभी आपसे प्यार करते हैं,’ जो इस बैठक में भारत के diplomatic tone को दर्शाता है।
पिछली बातचीत में, 24 मार्च को, मोदी ने पश्चिम एशिया में शांति बहाली का समर्थन किया था और होर्मुज जलडमरूमध्य के खुले और सुरक्षित रहने की उम्मीद जताई थी। इस बार भी भारत की चिंता स्पष्ट है: क्षेत्र में लड़ाई से तेल की आपूर्ति और समुद्री मार्ग प्रभावित हो सकते हैं, जो भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए गंभीर economic risk ला सकता है।
ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में हुई वार्ता करीब 21 घंटे तक चली, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकला। अब ट्रंप के बयानों में aggressive posture दिख रही है, और वे ईरान को तबाह करने की threats दे रहे हैं। हालांकि, ऐसी खबरें भी हैं कि दूसरे दौर की वार्ता जल्द हो सकती है, जो अभी अनिश्चित लग रही है।
भारत के लिए यह समय critical है। एक तरफ ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती, दूसरी तरफ वैश्विक ताकतों के बीच संतुलन बनाए रखना। इस बैठक ने यह दिखाया कि भारत और अमेरिका के बीच strategic coordination बढ़ रहा है, खासकर जब क्षेत्रीय stability की बात आती है।
40 मिनट की बातचीत? यह साफ दिखाता है कि serious issue गंभीर मुद्दा है। आमतौर पर ऐसे कॉल कुछ मिनट के होते हैं।
मोदी जी ने 'हम सभी आपसे प्यार करते हैं' कहकर तो diplomatic skill राजनयिक कौशल दिखा दिया। लेकिन क्या ट्रंप ऐसे शब्दों से प्रभावित होते हैं?
ऊर्जा सौदे अपेक्षित हैं? उम्मीद है कि तेल की price stability कीमत स्थिरता के लिए कुछ ठोस हो। वरना पेट्रोल-डीजल फिर आसमान छू लेगा।
ट्रंप की धमकियां देखकर लगता है कि वह त्वरित सैन्य कार्रवाई की ओर बढ़ रहे हैं। यह दुनिया के लिए खतरनाक हो सकता है।
वार्ता विफल हो गई, लेकिन दूसरे दौर की खबर? क्या यह सिर्फ political show राजनीतिक प्रदर्शन है? ईरान और अमेरिका वाकई शांति चाहते हैं?
अगर होर्मुज बंद होता है, तो भारत का oil supply तेल आपूर्ति सीधे प्रभावित होगा। यह सिर्फ राजनयिक नहीं, बल्कि आर्थिक जोखिम है।