अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में भारत की भूमिका पर अमेरिकी राजदूत ने कहा— 'भारत को खुद तय करना होगा'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बीच 40 मिनट की फोन conversation के बाद, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एक महत्वपूर्ण statement दिया है। गोर ने कहा कि अमेरिका मध्य पूर्व में शांति प्रक्रिया में भारत की participation का स्वागत करेगा, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि भारत को खुद तय करना होगा कि वह क्या role निभाना चाहता है।
गोर ने कहा कि peace process में global स्तर पर कई देश शामिल हो सकते हैं, और भारत भी उनमें से एक है। उन्होंने कहा, 'सच कहूं तो यह भारत के लिए एक question है।' यह comment ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी है और diplomacy के जरिए स्थिरता बनाए रखने की कोशिशें चल रही हैं।
इस बातचीत के बाद द्विपक्षीय relations में और मजबूती आने की उम्मीद है। गोर ने संकेत दिया कि कुछ ही दिनों में trade और अन्य मुद्दों पर बड़ी announcements हो सकती हैं। हालांकि, उन्होंने इस बारे में कोई details देने से इनकार कर दिया कि इन घोषणाओं में क्या शामिल होगा।
गोर ने यह भी बताया कि अगले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भारत की यात्रा करेंगे, जो ट्रंप की proposed यात्रा से पहले का एक महत्वपूर्ण कदम है। इस यात्रा से दोनों देशों के बीच dialogue को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। भारत के लिए यह एक critical समय है, जब वह strategic रूप से चुनाव करने के लिए तैयार है।
अमेरिका की तरफ से यह pressure दबाव साफ है कि भारत को भी उनके साथ खड़ा होना चाहिए।
अगर हम शांति में भूमिका निभाते हैं तो global image वैश्विक छवि मजबूत होगी, लेकिन साथ में risk जोखिम भी है।
हमेशा अमेरिका के पीछे भागने की बजाय अपनी independent policy स्वतंत्र नीति बनानी चाहिए।
अगले महीने विदेश मंत्री की यात्रा से पहले यह message संदेश जानबूझकर दिया गया है।
क्या भारत वाकई peace efforts शांति प्रयासों में शामिल हो पाएगा या यह सिर्फ अलंकारिकता है?
व्यापार की घोषणाएं तो आएंगी, लेकिन क्या आम आदमी को benefit लाभ मिलेगा?