मुनीर के डबल गेम की ट्रंप को लग गई है भनक, जानिए अमेरिका-ईरान को कैसे बेवकूफ बना रहा पाकिस्तान
पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बढ़ती नजदीकी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक major issue बन गई है। जहां ट्रंप मुनीर को अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का key player मान रहे हैं, वहीं अमेरिकी विशेषज्ञ चेतावनी जारी कर रहे हैं कि मुनीर के पास दोहरी भूमिका निभाने की clear potential है।
फॉक्स न्यूज़ डिजिटल की एक रिपोर्ट के अनुसार, मुनीर के ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के साथ deep ties रहे हैं, जिसमें पूर्व कमांडर कासिम सुलेमानी से व्यक्तिगत संपर्क भी शामिल हैं। यही नहीं, उनका कार्यकाल ऑपरेशन सिंदूर की military defeat के बावजूद उन्हें फील्ड मार्शल के पद पर प्रमोट करने तक पहुंच गया — एक ऐसा कदम जो उनकी political control को दर्शाता है।
अमेरिकी विश्लेषकों का तर्क है कि पाकिस्तान ने अतीत में भी ऐसी दोहरी नीति अपनाई है। 'फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसी' के बिल रोगियो ने अफगानिस्तान युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि पाकिस्तान publicly supported करता था, लेकिन पर्दे के पीछे तालिबान को सहायता दे रहा था। ऐसे में मुनीर के वर्तमान diplomatic role पर भी संदेह जताया जा रहा है।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि मुनीर ट्रंप के साथ अपने संबंधों का उपयोग ईरान के हितों को indirectly protect रखने के लिए कर सकते हैं। यह रणनीति न केवल पाकिस्तान को अमेरिका के लिए एक अनिवार्य intermediary बनाए रखेगी, बल्कि ईरान के साथ गुप्त संबंधों को भी बचाए रखेगी।
इस बीच, पाकिस्तान के भीतर मुनीर की ताकत नागरिक सरकार से भी आगे बढ़ती दिख रही है। वे परवेज मुशर्रफ के बाद के सबसे powerful general माने जाते हैं, जिनके पास न केवल सेना, बल्कि सेना-संचालित व्यापारिक साम्राज्य और नागरिक नीतियों पर भी direct influence है। इस संदर्भ में, ट्रंप के साथ उनकी दोस्ती केवल वैश्विक राजनयिकता नहीं, बल्कि एक व्यूहरचनात्मक geopolitical play लग रही है।
अमेरिका को लगता है कि वे सब कुछ नियंत्रित कर रहे हैं, लेकिन असल में regional players क्षेत्रीय खिलाड़ी उन्हें ही नियंत्रित कर रहे हैं।
मुनीर वाकई smart strategist चतुर रणनीतिकार लगते हैं। एक साथ दो शक्तियों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं है।
फॉक्स न्यूज़ की रिपोर्ट पर भरोसा करना risky move जोखिम भरा कदम हो सकता है। क्या यह वाकई तथ्य है या सिर्फ नैरेटिव?
अफगानिस्तान युद्ध का इतिहास बार-बार खुल रहा है। अमेरिका फिर उसी mistake repeat गलती की पुनरावृत्ति कर रही है।
ईरान को लग रहा होगा कि उनका strategic partner रणनीतिक साझेदार अमेरिका के भीतर एक दरवाजा खोल रहा है।
क्या ट्रंप वाकई शांति चाहते हैं, या बस एक political win राजनीतिक जीत की तलाश में हैं?