उलटे पांव पीछे हटे शहबाज, मुनीर ने रद्द की यूएस यात्रा, क्या ट्रंप पहुंचेंगे इस्लामाबाद?
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपना तुर्की दौरा abruptly खत्म कर इस्लामाबाद की ओर वापसी की है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच हाई-स्टेक वार्ता का दूसरा दौर उनकी राजधानी में शुरू होने वाला है। सूत्रों के मुताबिक, यह बातचीत 19 या 20 अप्रैल को हो सकती है, जिसे क्षेत्रीय शांति के लिए एक critical मौका माना जा रहा है। पहले दौर की विफलता के बाद, इस बार पाकिस्तान किसी भी कीमत पर वार्ता को बेनतीजा नहीं होने देना चाहता।
इस बीच, पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने अपना वाशिंगटन दौरा canceled कर दिया है ताकि वे इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता की सुरक्षा और strategic तैयारियों का सीधे नेतृत्व कर सकें। इस कदम से साफ है कि पाकिस्तानी स्थापना इस बैठक को अत्यधिक गंभीरता से ले रही है। अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडल रविवार सुबह तक इस्लामाबाद पहुंचने वाले हैं, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
ईरान ने तनाव कम करने के संकेत में होर्मुज जलडमरूमध्य को व्यापारिक जहाजों के लिए फिर से खोल दिया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि यह जलमार्ग संघर्ष विराम के दौरान पूरी तरह खुला रहेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कदम का welcomed किया है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया है कि अंतिम समझौते तक ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहेगी।
सबसे बड़ा विस्फोट ट्रंप के statement से आया, जिसमें उन्होंने समाचार वेबसाइट 'Axios' को दिए इंटरव्यू में कहा कि वे ईरान के साथ "एक या दो दिन के भीतर" समझौते की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर इस्लामाबाद में अंतिम बातचीत होती है, तो वे personally मौजूद रह सकते हैं। ऐसा होने पर यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत होगी और मिडिल ईस्ट की राजनयिक तस्वीर बदल सकती है।
पहली बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ के बीच परमाणु और क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर कोई सहमति नहीं बन पाई थी। अब सवाल यह है कि क्या दूसरा दौर सचमुच तनाव कम करेगा या सिर्फ एक showcase साबित होगा। दुनिया की निगाहें इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जहां शांति या आग में से किसी एक के लिए मंच तैयार हो रहा है।
इतने बड़े diplomatic कूटनीतिक दांव में पाकिस्तान का खेलना देखना दिलचस्प है, लेकिन क्या वे वाकई तटस्थ रह पाएंगे?
जनरल मुनीर का दौरा रद्द करना दिखाता है कि सेना इस security सुरक्षा बैठक को लेकर कितनी गंभीर है।
होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से वैश्विक व्यापार पर असर पड़ेगा। यह केवल political राजनीतिक नहीं, आर्थिक जोखिम भी है।
अगर ट्रंप वाकई इस्लामाबाद जाते हैं, तो यह एक बड़ा historic ऐतिहासिक पल होगा। उनका अंदाज़ हमेशा अप्रत्याशित होता है।
हर बार ऐसे claims दावे होते हैं, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता। देखते हैं इस बार क्या होता है।
एक या दो दिन में समझौता? यह बहुत optimistic आशावादी लग रहा है। क्या यह केवल प्रचार है?