फफूंदी लगी पिन्नी और बच्चों का जोखिम: क्या मिड-डे-मील अब 'मिड-डे-रिस्क' बन चुकी है?

हरियाणा के हिसार जिले में सरकारी स्कूलों के बच्चों के स्वास्थ्य के साथ एक बार फिर compromise किया जा रहा है। नए शैक्षणिक सत्र के पहले महीने में ही स्कूलों को वितरित की जा रही food में फफूंद लगी पिन्नी मिली है। गांव बुगाना और खेड़ी बरखी स्थित सरकारी स्कूलों में बच्चों को meal के तौर पर यह खराब मिठाई दी जा रही है। यह कोई अकेला मामला नहीं है — पूरे जिले में पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले 61,065 बच्चों के स्वास्थ्य को खतरा है। ऐसे में सवाल उठता है: क्या सरकार की midday योजना के तहत बच्चों को पौष्टिक भोजन नहीं, बल्कि जोखिम दिया जा रहा है?

इसके पीछे सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि लगातार दोहराई जा रही उपेक्षा है। पिछले सत्र में भी हरियाणा एग्रो इंडस्ट्री कारपोरेशन लिमिटेड और हरहित स्टोर ने खराब jaggery की आपूर्ति की थी। स्कूलों में जरूरत से ज्यादा सामग्री भेजी गई थी। लेकिन निदेशालय ने न तो कोई action की, न ही टेंडर रद किए। इस बार फिर वही companies आपूर्ति कर रही हैं — और फिर वही नतीजा। जब सजा नहीं मिलती, तो गलती भी नहीं सुधरती।

मौलिक शिक्षा अधिकारी रामरतन का कहना है कि मामले की information बीईओ से ली जाएगी और यदि आरोप सही पाए गए तो मुख्यालय को अवगत कराया जाएगा। लेकिन यही तो समस्या है — प्रतिक्रिया हमेशा after में आती है। बच्चों के health के साथ खिलवाड़ को रोकने के लिए निगरानी और जवाबदेही की तात्कालिक व्यवस्था की आवश्यकता है। अब तक तो यह योजना बच्चों को भूख से बचाने के बजाय रोगों के risk में डाल रही है।

खास बात यह है कि पिछले सत्र में गुड़ की आपूर्ति के लिए स्थानीय बाजारों को छूट दी गई थी, लेकिन अन्य सामग्री अभी भी उन्हीं कंपनियों से आ रही हैं जिन पर गुणवत्ता के मामले में सवाल हैं। यह दिखाता है कि नीति में अंतर्विरोध है। एक तरफ सुधार की बात की जाती है, तो दूसरी तरफ उसी व्यवस्था को बरकरार रखा जाता है जो बार-बार विफल हो चुकी है। बच्चों के पोषण को गंभीरता से लिया जाए, तभी मिड-डे-मील योजना का purpose पूरा हो पाएगा।

इस घटना ने न केवल स्वास्थ्य को जोखिम में डाला है, बल्कि मिड-डे-मील योजना की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जब बच्चे स्कूल जाकर खाने के बजाय बीमार पड़ रहे हों, तो शिक्षा का environment कैसे सुरक्षित हो सकता है? अब सवाल यह नहीं कि कौन जिम्मेदार है, बल्कि यह है कि कब तक बच्चों के future के साथ खिलवाड़ चलता रहेगा।

प्रतिक्रियाएँ 8

  • माता_पिता_की_आवाज

    अगर यही हाल रहा, तो बच्चों को स्कूल में क्यों भेजें? trust उस सिस्टम पर कैसे करें जो उनकी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहा है?

  • हरियाणा_वासी

    पिन्नी में फफूंद लगी है? ये तो बच्चों के stomach से खिलवाड़ है।

  • शिक्षा_की_लड़ाई

    इस योजना को बचाने के लिए निगरानी कमेटी का गठन होना चाहिए। हर महीने निरीक्षण होना चाहिए।

  • प्रगतिशील_हिसार

    लेकिन क्या कोई बच्चा बीमार पड़ा है? कोई सबूत है या सिर्फ आरोप हैं?

  • आम_नागरिक

    हर बार एक ही बहाना — 'जांच की जाएगी'। कब तक?

  • सच्चाई_की_तलाश

    खराब गुड़, खराब पिन्नी… ये कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रणालीगत असफलता है।

  • निराश_अध्यापक

    हम शिक्षक भी परेशान हैं। हमें खिलाना है, लेकिन हमें पता है कि खाना खराब है। moral दुविधा है।

  • आशा_की_किरण

    उम्मीद है कि अब कोई सख्त कदम उठाया जाएगा। बच्चे बेकसूर हैं।

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

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