US Iran Peace Talks: यूएस के साथ शांति पर बात से पहले ईरान ने रखी ये 2 शर्तें, बोला- पहले करो पूरा, फिर बढ़ेंगे आगे

इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच peace talks से पहले तनाव चरम पर है। ईरान ने साफ कर दिया है कि बातचीत तभी शुरू होगी जब उसकी दो मुख्य conditions पूरी हों: लेबनान में ceasefire लागू किया जाए और उसकी blocked assets को वापस दिया जाए। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाग़ेर गालिबाफ़ ने कहा कि इनके बिना बैठक का कोई meaning नहीं है।

इस बीच, ईरानी सेना के प्रवक्ता इब्राहिम ज़ोलफ़क़ारी ने warning दी है कि जब तक लेबनान पर हमले जारी रहेंगे, ईरान वार्ता में हिस्सा नहीं लेगा। उन्होंने कहा कि सैन्य response "बहुत जल्द" और "बेहद विनाशकारी" हो सकती है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति और इजरायली प्रधानमंत्री को सीधे message दिया कि वे ईरान को धमकाना बंद करें और अपनी हार स्वीकार कर लें।

वहीं, अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने तेहरान को चेतावनी देते हुए कहा कि वह युद्ध खत्म करने के goal से आ रहे हैं और वार्ता को game न समझा जाए। उन्होंने seriousness जताई कि अमेरिका स्थायी समाधान चाहता है, न कि छल-कपट।

इस उच्च-दबाव बैठक की मेजबानी कर रहे पाकिस्तान ने पूरे शहर में security arrangements को अत्यधिक सख्त बना दिया है। इस्लामाबाद में 10,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, 'रेड ज़ोन' को सील कर दिया गया है, और air defense प्रणालियों को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है। लड़ाकू विमान, टैंकर और AWACS भी तैनात हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान के लिए यह बैठक केवल एक अवसर नहीं, बल्कि एक diplomatic test भी है। चीन के सहयोग से पहले एक अस्थायी संघर्ष-विराम करवाने के बाद, अब इस्लामाबाद एक स्थायी समाधान की दिशा में efforts कर रहा है। लेकिन ईरान की कठोर शर्तें और अमेरिका की चेतावनियाँ दर्शाती हैं कि आगे का रास्ता आसान नहीं होगा।

इस बैठक के परिणाम से मध्य पूर्व में शांति या तनाव में वृद्धि हो सकती है। दुनिया इस नाजुक moment पर नज़र टिकाए हुए है, जब दो शक्तियाँ युद्ध के कगार पर खड़े होकर बातचीत की मेज पर बैठने जा रही हैं।

प्रतिक्रियाएँ 6

  • दक्षिणपंथी

    अगर ईरान अपनी assets को वापस लेता है, तो क्या वह वास्तव में शांति चाहता है या बस दबाव बना रहा है?

  • खबरनवीस

    पाकिस्तान की security तैयारियाँ तो बहुत सख्त हैं, लेकिन क्या वह इजरायल की ओर से किसी छापे को रोक पाएगा?

  • अंतरराष्ट्रीय

    यह वार्ता सिर्फ दो देशों के बीच नहीं, बल्कि पूरे region के भविष्य का फैसला कर सकती है।

  • ज़माना_बदला

    अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत? यकीनन एक surprise मोड़ है, लेकिन क्या यह वाकई टिकेगा?

  • विश्लेषक

    ईरान की शर्तें सिर्फ demands नहीं हैं—वे उसकी रणनीतिक posture भी बताती हैं।

  • शांति_चाहता

    लेबनान में civilian deaths को देखते हुए, एक तत्काल संघर्ष-विराम तो ज़रूरी है।

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

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