ईरान युद्ध: अमेरिकी संदेश लेकर पाक सेना प्रमुख आसिम मुनीर पहुंचे तेहरान, US-ईरान वार्ता पर जल्द निकलेगा रास्ता?
पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने अमेरिका का एक high-level message लेकर तेहरान की यात्रा की है, जिसके जरिए मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के नए दौर की राह खोलने की कोशिश की जा रही है। इस यात्रा के जरिए पाकिस्तान की भूमिका एक मध्यस्थ के तौर पर सामने आई है, जबकि अमेरिका के साथ ईरान की हालिया वार्ता विफल हो चुकी है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि इस्लामाबाद में हुई वार्ता के बाद अमेरिका की कुछ demands बेबुनियाद और अनुचित थीं, जिसके चलते बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बावजूद, ईरान ने पाकिस्तान के साथ लगातार communication बनाए रखा है, और अब तेहरान में चल रही बैठकों में अगले कदम का आकलन किया जा रहा है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका को बातचीत के लिए एक logical framework अपनाना होगा।
ट्रंप प्रशासन की ओर से भी संकेत दिए गए हैं कि इस हफ्ते ईरान के साथ दूसरे दौर की वार्ता शुरू हो सकती है। हालांकि, अमेरिकी नौसेना ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी जारी रखी है, जो ईरान के maritime trade को बाधित कर रही है। इस दबाव के बावजूद, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि सीजफायर बढ़ाने की need नहीं है, और समझौता होना 'बेहतर' होगा।
मुनीर के विमान को पाकिस्तानी वायुसेना के 10 JF-17 लड़ाकू विमानों ने रावलपिंडी से तेहरान तक escort किया, जो इस यात्रा की संवेदनशील प्रकृति को दर्शाता है। तेहरान पहुंचने के बाद ईरानी लड़ाकू विमानों ने लगातार पेट्रोलिंग की, जिससे तनाव का माहौल बना रहा। सूत्रों के मुताबिक, मुनीर ईरान से अपील कर सकते हैं कि अगर वार्ता विफल होती है, तो ईरान और उसके प्रॉक्सी समूह proxy attacks न करें, खासकर सऊदी अरब में, जहां पाकिस्तान का रक्षा समझौता लागू है।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर tension बना हुआ है। लेबनान में सीजफायर को ईरान की ओर से सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन अगर अमेरिका ज्यादा मांगें रखता है या बातचीत के लिए अनुचित शर्तें थोपता है, तो शांति प्रक्रिया में obstruction आ सकती है। अगले कुछ दिनों में वार्ता के नए दौर की घोषणा की संभावना है, लेकिन यह ईरान की शर्तों पर निर्भर करेगा।
पाकिस्तान अमेरिका का संदेश लेकर जा रहा है, लेकिन क्या वो खुद ईरान के साथ अपने regional posture क्षेत्रीय रुख को समझता है? ये सब दिखावा है।
अमेरिका नाकाबंदी कर रहा है और फिर भी वार्ता की बात कर रहा है? ये pressure tactic दबाव वाली रणनीति है, ईरान इसे आसानी से स्वीकार नहीं करेगा।
मुनीर के एस्कॉर्ट के लिए 10 लड़ाकू विमान? इतना military display सैन्य प्रदर्शन तो बस घबराहट दिखाता है।
अगर ईरान और अमेरिका बात करने को तैयार हैं, तो लेबनान में सीजफायर एक positive signal सकारात्मक संकेत हो सकता है। उम्मीद है।
ट्रंप कह रहे हैं कि समझौता बेहतर होगा, लेकिन नाकाबंदी जारी रख रहे हैं। ये contradictory actions विरोधाभासी कदम हैं।
क्या अगर बात नहीं बनी तो युद्ध शुरू हो जाएगा? risk जोखिम बहुत ज्यादा है।