टेस्ट में बस अटैक काफी नहीं: भज्जी का युवा तूफान पर चेतावनी
टेस्ट क्रिकेट में युवा प्रतिभा को तुरंत मौका देने की आम राय के बीच, talent पर भरोसा करने की बजाय संयम की जरूरत होती है — यही संदेश हरभजन सिंह ने वैभव सूर्यवंशी के मामले में BCCI को दिया है। जिस खिलाड़ी ने महज 14 साल की उम्र में IPL में डेब्यू किया और aggressive बल्लेबाजी से सभी का ध्यान खींचा, उसके लिए अब टेस्ट टीम में जगह की मांग तेज हो रही है। लेकिन भज्जी का कहना है: चेतावनी दी जाए, जल्दबाजी न की जाए। impact करना आसान है, लेकिन टेस्ट मैच में टिक पाना एक अलग कला है।
हरभजन ने स्पष्ट किया कि टेस्ट क्रिकेट सिर्फ attack नहीं, बल्कि defense , सही माइंडसेट और technique का खेल है। जायसवाजल के उदाहरण को लेकर उन्होंने बताया कि वर्तमान समय का सबसे बेहतर batsman वही है जो एक सेशन तक गेंद को छोड़ सकता है और फिर अवसर मिलते ही रन बना सकता है। यह balance , जो सूर्यवंशी और ईशान किशन जैसे खिलाड़ियों में अभी कमजोर है, टेस्ट क्रिकेट में सफलता की चाबी है।
खतरा यह है कि बिना पर्याप्त तैयारी के किसी युवा को tough दौरे जैसे इंग्लैंड पर भेजा जाए। वहां की पिचें swing और movement के लिए मशहूर हैं, जो किशोर बल्लेबाजों के लिए challenge बन सकती हैं। भज्जी का डर है कि ऐसा कदम न सिर्फ खिलाड़ी के आत्मविश्वास पर impact डाले, बल्कि उसके career को भी डगमगा सकता है।
अगले कुछ महीनों में भारत को अफगानिस्तान और श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट मैच खेलने हैं — जो युवाओं को आजमाने के लिए ideal मौका हो सकता है। लेकिन भज्जी की बात में तर्क है: सही तैयारी के बिना टेस्ट डेब्यू एक risk है। decision जल्दबाजी में नहीं, बल्कि विचार-विमर्श से लिया जाना चाहिए। यही खिलाड़ी के भविष्य के लिए सबसे जिम्मेदारी भरा रास्ता होगा।
हरभजन सही कह रहे हैं। test cricket टेस्ट क्रिकेट में सिर्फ हिट करना काम नहीं चलाता।
लेकिन क्या हम बहुत ज्यादा सुरक्षित खेल रहे हैं? कभी-कभी तो opportunity मौका मिलना भी जरूरी होता है।
इंग्लैंड की पिच पर 14 साल के बच्चे को डालना मतलब है उसे तोड़ना। भज्जी ने point पॉइंट साफ किया है।
टेस्ट मैच में defense डिफेंस और धैर्य दिखाना भी तो एक तरह का हमला है।
मार्केटिंग नहीं, मैच जीतना मायने रखता है। अगर बच्चा तैयार है, तो आगे आए।
BCCI को युवाओं के लिए एक स्पष्ट pathway पाथवे बनानी चाहिए, न कि भावनाओं में आकर फैसले लेने चाहिए।
यशस्वी जायसवाल ने साबित कर दिया कि सही मानसिकता से हर फॉर्मेट में छाप छोड़ी जा सकती है।
हरभजन जैसे दिग्गजों की राय हमेशा सम्मान के साथ सुनी जानी चाहिए। उनके अनुभव में मूल्य है।