तीन दिन का अल्टीमेटम: पाइपलाइन बचेगी या ध्वस्त?
जब एक विदेश मंत्री का पाकिस्तान से रूस का रुख करना एक तीन दिन की अल्टीमेटम में बदल जाए, तो समझ लीजिए—यह सिर्फ राजनयिक चल नहीं, बल्कि भूराजनीति का जीवंत खेल है। ईरान के विदेश मंत्री की यात्रा से भड़के डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी: अगर ईरान तीन दिन में negotiate नहीं करता, तो उसकी सारी तेल की pipeline तबाह हो जाएगी। यह कोई मामूली धमकी नहीं—ट्रंप कह रहे हैं कि विस्फोट इतना massive होगा कि ईरान फिर कभी वैसी पाइपलाइन नहीं बना पाएगा।
तेल का निर्यात ईरान की आर्थिक नाड़ी है, और अमेरिका उस पर दबाव बनाने में लगा है। ट्रंप का दावा है कि नाकेबंदी के कारण ईरान जहाजों से भी export नहीं कर पा रहा। अब अगर पाइपलाइनें भी ध्वस्त हो गईं, तो निर्यात बिल्कुल halt हो जाएगा। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि ईरान तेल निर्यात करने के लायक भी नहीं बचेगा। एक ऐसा दबाव जो न सिर्फ अर्थव्यवस्था को झकझोरे, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति को भी।
इस बीच, ईरान ने अमेरिका को लिखित proposal भेजा, जिसे ट्रंप ने पहले खारिज कर दिया। लेकिन फिर उन्होंने इशारा किया कि दूसरा प्रस्ताव ‘बेहतर’ है। फिर भी, उनके वार्ताकार अब इस्लामाबाद नहीं जाएंगे। बल्कि, सारी communication फोन पर होगी। ट्रंप ने साफ कहा—ईरान जब चाहे, फोन कर सकता है। यह एक अजीब विरोधाभास है: एक तरफ कूटनीति के दरवाजे खुले हैं, लेकिन बिना चेहरा दिखाए।
तनाव तब और बढ़ गया जब ईरानी विदेश मंत्री अराघची रूस पहुंचे और व्लादिमीर पुतिन से वार्ता करने वाले हैं। रूसी मीडिया ने इसकी पुष्टि की। यह यात्रा अमेरिका को पसंद नहीं आई—खासकर ऐसे समय में जब शांति वार्ता का पहला दौर पहले ही failed रह चुका है। अराघची का मानना है कि मॉस्को में आगे की चर्चा होगी। लेकिन ट्रंप के लिए यह संकेत है कि ईरान गठबंधन ढूंढ रहा है—और वह उसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।
इस कहानी में हर कदम पर tension का एक नया परत है। क्या ईरान तीन दिन में समझौता करेगा? क्या अमेरिका वाकई पाइपलाइन पर हमला करेगी? या फिर यह सब bluff का खेल है—जहां शब्द हथियार बन जाते हैं? दुनिया की नजर अब उस फोन कॉल पर है जो कभी भी आ सकती है—और जो संघर्ष को शांत कर सकती है या और भड़का सकती है।
अगर वाकई पाइपलाइन तबाह हो गई, तो क्या यह sanction प्रतिबंध से ज्यादा कुछ होगा?
अमेरिका बोलता है ‘फोन पर बात करो’, लेकिन जब फोन आएगा तो शायद बस रिकॉर्डिंग सुनाई देगी!
तेल की पाइपलाइन तो बहुत बड़ा बुनियादी ढांचा है। उसे तबाह करना इतना आसान नहीं।
ईरान कह रहा है कि वह युद्ध खत्म करना चाहता है, लेकिन ally मित्र के रूप में रूस को चुन रहा है। क्या यह शांति की ओर कदम है?
इस तरह की धमकियां अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ नहीं हैं?
ट्रंप के लिए हर बातचीत एक आमना-सामना बन जाती है।