24 घंटे में दो बार इस्लामाबाद: ईरानी विदेश मंत्री की दौड़ और ट्रंप का फ़ोन

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने diplomacy के मैदान में एक अनोखा तरीका अपनाया है: पाकिस्तान में सिर्फ 24 घंटे के भीतर वापसी। शनिवार को इस्लामाबाद से ओमान जाने के बाद, रविवार को वह मस्कट में ओमान के सुल्तान से meet करने के बाद फिर वापस इस्लामाबाद पहुँच गए। यह तेज़ गति वाली movement ऐसे समय आई है जब अमेरिका ने पाकिस्तान में होने वाली शांति बातचीत के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल वापस बुला लिया। ट्रंप प्रशासन का कहना था कि यात्रा में waste होगा। एक ऐसा माहौल जब दोनों ओर से बातचीत की बात तो हो रही है, लेकिन असली कदम एक-दूसरे से दूर लग रहे हैं।

इस बीच, अमेरिकी सेना ने इस्लामाबाद से अपने security हटा लिए हैं — एक स्पष्ट संकेत कि वहाँ अमेरिकी टीम के लौटने की संभावना नहीं है। अराग़ची की घूमती राजनीति के बीच, उन्होंने पाकिस्तान के फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर से talk की और बीबीसी उर्दू के विश्लेषण के अनुसार, ईरान की ओर से अमेरिका के साथ शांति वार्ता के लिए एक proposal प्रस्तुत करने की तैयारी है। लेकिन ट्रंप का कहना है कि अगर ईरान बातचीत चाहता है, तो वे बस call कर सकते हैं। एक तरफ दौड़ते राजनयिक, दूसरी तरफ एक फ़ोन कॉल का सुझाव — युद्ध और शांति के बीच का अंतर कहीं इसी टेंशन में छिपा है।

अराग़ची ने सिर्फ पाकिस्तान तक सीमित नहीं रहना चाहा। उन्होंने मिस्र, तुर्की, क़तर और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों के साथ telephone पर चर्चा की। मिस्र के बद्र अब्देल अत्ती के साथ संघर्ष विराम, तुर्की के हकन फ़िदान के साथ क्षेत्रीय तनाव, और क़तर-सऊदी नेताओं के साथ राजनयिक प्रयासों पर विस्तार से बातचीत हुई। तुर्की के विदेश मंत्री फ़िदान ने भी अमेरिकी वार्ताकारों के साथ बात करते हुए ईरान-अमेरिका वार्ता में progress पर चर्चा की। यह नेटवर्क बनाने की कोशिश दिखाती है कि ईरान अकेले नहीं बल्कि क्षेत्रीय सहयोग के ज़रिए वार्ता की मेज़ पर वापसी चाहता है।

इधर, अमेरिकी सैन्य बलों ने seize को जारी रखा है। अरब सागर में अमेरिकी हेलीकॉप्टर ने ईरान के शैडो फ़्लीट के जहाज़ 'सिवान' को stop , जिसे ईरानी ऊर्जा उत्पादों के अवैध transport का संदिग्ध माना जा रहा है। सेंटकॉम के अनुसार, अब तक 37 जहाज़ों को मोड़ा जा चुका है। यह आर्थिक दबाव ऐसे समय बरकरार है जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कार्यालय ने चेतावनी दी है कि war ख़त्म होने के बाद भी कीमतें आठ महीने तक ऊपर रह सकती हैं। ऊर्जा, भोजन और flight की बढ़ती लागत दुनियाभर के नागरिकों पर असर डाल रही है।

उधर, आईआरजीसी की कुद्स फ़ोर्स के कमांडर इस्माइल क़ानी ने दावा किया है कि प्रतिरोध मोर्चा पहले से कहीं अधिक united है। उन्होंने हिज़्बुल्लाह के समर्थन पर ज़ोर दिया और कहा कि इसराइल अपने लक्ष्य प्राप्त करने में हाल के दशकों से fail रहा है। इसके जवाब में इसराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि हिज़्बुल्लाह की कार्रवाइयाँ युद्धविराम के लिए ख़तरा हैं और उन्हें target बनाया जाएगा। युद्ध जारी है या नहीं, लेकिन तनाव की लकीरें तेज़ी से बढ़ रही हैं।

प्रतिक्रियाएँ 8

  • दिल्ली_की_धड़कन

    इतनी तेज़ कूटनीति देखकर लगता है कि वास्तविक लड़ाई मीटिंग रूम में लड़ी जा रही है। diplomacy का नया मैदान हवाई अड्डे बन गए हैं।

  • ग़म_ए_लाहौर

    एक ओर फ़ोन कॉल का सुझाव, दूसरी ओर जहाज़ों को रोकना — क्या यही है peace की तैयारी?

  • क़ैद_ए_वक़्त

    अराग़ची की रफ़्तार तेज़ है, लेकिन क्या अमेरिका सच में सुनने को तैयार है? listen भी एक राजनीति है।

  • मिज़ाज_ए_मुल्क

    युद्ध ख़त्म होने के बाद भी कीमतें बढ़ेंगी? तो जंग अब गरीबों के बजट पर भी हो रही है। cost सिर्फ़ तेल की नहीं, जीवन की भी है।

  • ज़हर_ए_वफ़ा

    इसराइल और ईरान के बीच का दरार इतना गहरा है कि कोई बातचीत नाटक लगती है।

  • रात_के_सफ़र

    शैडो फ़्लीट? लगता है जैसे पूरा मामला अंधेरे में चल रहा हो। shadow में तेल, छाया में राजनीति।

  • हवा_ए_हिज़्ब

    हिज़्बुल्लाह को लेकर इतना तनाव क्यों? क्या वे वाकई इतने ख़तरनाक हैं या सिर्फ़ बहाना है?

  • सफ़र_ए_नौ

    अगर 37 जहाज़ रोके जा सकते हैं, तो क्या एक शांति समझौता भी संभव नहीं? possible है, बस इच्छा चाहिए।

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

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