'ऐन वक्त पर...', JP Associates मामले में वेदांता को झटका; अदाणी से कहां पीछे रहे अनिल अग्रवाल? CoC ने दिया स्पष्ट जवाब

नई दिल्ली में कानूनी लड़ाई अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है, जहां जयप्रकाश एसोसिएट्स (JP Associates) के लिए चल रही बोली में वेदांता को एक बड़ा झटका लगा है। नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने सोमवार को स्पष्ट किया कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों की समिति (CoC) ने अदाणी समूह को चुनने में कोई bias नहीं किया। इस प्रक्रिया को transparent और निष्पक्ष बताते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अदाणी की बोली ने total evaluation में सबसे ऊपर का स्थान हासिल किया।

वेदांता लिमिटेड, जिसे अनिल अग्रवाल चलाते हैं, ने दावा किया था कि उनका संशोधित bid अदाणी के मुकाबले 3,400 करोड़ रुपये अधिक था। लेकिन CoC ने इसे अस्वीकार कर दिया, क्योंकि यह प्रस्ताव after deadline आया था। बैंकों का तर्क है कि अगर वे वेदांता के नए प्रस्ताव को स्वीकार करते, तो पूरी resolution process फिर से शुरू होनी पड़ती, जिससे JP Associates के कर्ज समाधान में बड़ी delay होती।

तुषार मेहता ने स्पष्ट किया कि कोई कंपनी ऐसे मामले में केवल इसलिए प्रक्रिया को challenge नहीं दे सकती कि वह अंतिम समय में अधिक money देने को तैयार है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के precedent का जिक्र करते हुए कहा कि 'ऐन वक्त पर' बोली बदलना bankruptcy process के सिद्धांतों के खिलाफ है। यह न केवल अन्य बोलीकर्ताओं के लिए अनुचित होगा, बल्कि creditor trust को भी कमजोर करेगा।

वेदांता ने 8 नवंबर 2025 को अपनी बोली में बदलाव किया, जिसमें वे इक्विटी निवेश 400 से 800 करोड़ रुपये तक बढ़ाने को तैयार थे। लेकिन बैंकों का कहना है कि सभी नियम पहले से तय थे और हर बोलीकर्ता को यह पता था कि final offer के बाद कोई संशोधन नहीं होगा। अब अगली सुनवाई में अदाणी की ओर से legal argument प्रस्तुत किया जाएगा, जबकि कोर्ट के सामने सवाल होगा कि क्या 'ज्यादा पैसे' की बात नियमों से ऊपर हो सकती है।

इस मामले का market impact भी महत्वपूर्ण है। अगर कोर्ट वेदांता के पक्ष में फैसला सुनाता, तो यह भविष्य की insolvency cases में अस्थिरता पैदा कर सकता था, क्योंकि हर कंपनी अंतिम समय में बोली बढ़ाकर प्रक्रिया को रोक सकती। अदाणी की जीत से investor confidence बरकरार रहेगी, लेकिन यह भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या छोटे खिलाड़ियों के लिए fair chance सुनिश्चित हो पाएंगे।

प्रतिक्रियाएँ 8

  • रामनाथ_बिज

    अगर हर कंपनी आखिरी समय में ऑफर बढ़ा दे, तो auction process का क्या मतलब रह जाएगा?

  • प्रिया_फाइनेंस

    अनिल अग्रवाल का दबाव समझ आता है, लेकिन नियम तो नियम होते हैं। bidding rules सभी के लिए समान होने चाहिए।

  • संजय_मीडिया

    तुषार मेहता ने ठीक कहा — 'ऐन वक्त पर' बदलाव से प्रक्रिया का integrity खतरे में पड़ जाती है।

  • कविता_लॉ

    वेदांता का तर्क मनभावना है, लेकिन कानून में timing हमेशा मायने रखता है।

  • रोहित_इन्वेस्ट

    अदाणी के लिए ये न सिर्फ आर्थिक जीत है, बल्कि strategic win भी है।

  • अंजलि_न्यूज

    क्या बैंक सच में निष्पक्ष थे? या बस perception बनाने की कोशिश कर रहे हैं?

  • मनोज_मार्केट

    3,400 करोड़ ज्यादा — ये कोई छोटी रकम नहीं है। क्या creditors वाकई इसे नजरअंदाज कर सकते हैं?

  • विकास_एनालिस्ट

    इस फैसले से आगे के resolution plans पर बड़ा असर पड़ेगा।

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

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