कोर्टरूम वीडियो कैसे लीक हुए... केजरीवाल के खिलाफ कौन पहुंचा अदालत? की गई ये मांग
दिल्ली हाईकोर्ट में एक नई अवमानना याचिका ने राजनीतिक और मीडिया दोनों दुनिया में pressure बढ़ा दिया है। वकील वैभव सिंह ने आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल, पत्रकार रवीश कुमार और कई विपक्षी नेताओं के खिलाफ याचिका दायर कर allegation लगाया है कि उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत की कार्यवाही का अनधिकृत वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर वायरल किया। इस घटना के बाद न्यायपालिका की image को नुकसान पहुंचाने की एक deliberate कोशिश की गई, जिसे याचिकाकर्ता ने 'साजिश' करार दिया है।
याचिका के अनुसार, केजरीवाल तब अदालत में थे जब वह खुद को दिल्ली शराब नीति मामले से अलग करने की request कर रहे थे। इसी दौरान अनधिकृत रूप से ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की गई और बाद में एक्स (पूर्व में ट्विटर), फेसबुक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे platforms पर साझा की गई। नियमों के अनुसार, बिना अनुमति के अदालती कार्यवाही की रिकॉर्डिंग और प्रसारण सख्ती से prohibited है, और इसका उल्लंघन गंभीर अपराध माना जाता है।
इस मामले में पहले ही उच्च न्यायालय के प्रशासन ने दिल्ली पुलिस को जांच के लिए directive जारी किए थे। अब याचिकाकर्ता ने न केवल वीडियो को तुरंत हटाने की मांग की है, बल्कि आरोपियों के खिलाफ SIT probe और अवमानना कार्रवाई की सिफारिश भी की है। यह मामला न केवल कानूनी बल्कि संवैधानिक concern भी पैदा कर रहा है, क्योंकि इसमें न्यायपालिका की independence को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
अगली सुनवाई 22 अप्रैल को मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच के समक्ष होने की संभावना है। यदि कोर्ट आरोपों को गंभीरता से लेता है, तो आरोपियों को नोटिस जारी किए जा सकते हैं। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा stake न्यायिक प्रणाली की public trust का है, जिसे बनाए रखना लोकतंत्र के लिए अत्यंत जरूरी है।
क्या सच में कोई सोचकर ऐसा कर सकता है? अदालत की recording रिकॉर्डिंग तो खुलेआम नहीं हो सकती।
ये मामला सिर्फ केजरीवाल तक सीमित नहीं है। यहां media ethics मीडिया नैतिकता का सवाल भी है।
अगर ये साबित हो गया कि वीडियो जानबूझकर लीक किया गया, तो penalty दंड होना चाहिए।
मैं तो हैरान हूं कि अदालत के अंदर भी कोई camera कैमरा चला सकता है।
इस तरह की कार्रवाई से न्यायपालिका पर perception धारणा खराब होती है।
रवीश कुमार का नाम देखकर हैरानी हुई। क्या वाकई उनका role भूमिका था इसमें?
सरकारी दबाव की बात करने वाले खुद under scrutiny जांच के दायरे में आ गए।
इस मामले में evidence सबूत कितने मजबूत हैं, यही तय करेगा कि कौन बचता है।