परीक्षा के नतीजे या चुनावी जुनून? यादव का दुर्ग में दोहरा संदेश
राजनीति और शिक्षा के बीच की लकीर पर एक ही दिन में दो घोषणाएं – एक नतीजे की तारीख और दूसरी सत्ता के दावे की। दुर्ग में शिक्षा minister गजेंद्र यादव ने सोमवार को अपने कार्यालय में public से सीधा संवाद किया, जहां 15 दिनों बाद उनकी वापसी थी। करीब एक लाख छात्रों के पंजीयन में आधार जोड़ने की लंबित प्रक्रिया के बीच, उन्होंने exam परिणामों को लेकर स्पष्टता दी: 10वीं और 12वीं के results 30 अप्रैल को घोषित किए जाएंगे। इस घोषणा ने उम्मीद जगाई, लेकिन सवाल भी छोड़े – आखिर कितने छात्र अब भी प्रणाली से बाहर हैं?
मंत्री ने लिंकिंग के चलते छात्र संख्या में कमी के सवाल पर स्पष्ट किया कि अभी बहुतों ने अपना आधार नहीं जोड़ा। लेकिन सभी को ऑनलाइन नामांकन कराया जा रहा है। गड़बड़ी की complaint पर जांच का वादा किया। इस बीच, एनसीईआरटी की textbooks के स्थान पर निजी प्रकाशकों की किताबों के उपयोग पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कलेक्टरों को action के निर्देश दिए। यह सख्ती मुख्यमंत्री के स्पष्ट आदेश के बाद आई है।
लेकिन शिक्षा से आगे बढ़कर यादव ने राजनीतिक मैदान में भी दावा पेश किया। पश्चिम बंगाल के चुनाव प्रचार से लौटे मंत्री ने campaign रैलियों में भीड़ को 'जनसैलाब' बताया। उनका तर्क: यह change की चाहत है। ममता बनर्जी की सरकार से लोगों की नाराजगी अब चरम पर है। और उनका दावा – बीजेपी win 192 से ज्यादा सीटें और पश्चिम बंगाल में government बनाएगी।
शिक्षा के मोर्चे पर, यादव ने uniforms , साइकिल और किताबें बांटने के लिए 15 जून से शाला प्रवेश उत्सव की घोषणा की। लेकिन बलरामपुर में यूनिफॉर्म के कचरे में मिलने के मामले पर उन्होंने जांच के आदेश दिए। यह घटना उसी सरकार के वादे के बीच आई है, जो शिक्षा को तरजीह देने की बात करती है। इन छोटी-छोटी लापरवाहियों में अक्षमता के संकेत हैं। और जनता देख रही है – वादे कितने पूरे होते हैं, कितने बस घोषणा बनकर रह जाते हैं।
यादव की आवाज़ में एक समय की गूंज थी – जब राजनीति कक्षा में घुलती थी और शिक्षा की घोषणाएं चुनावी मैदान की तैयारी बन जाती थीं। 30 अप्रैल के नतीजे न केवल छात्रों की किस्मत तय करेंगे, बल्कि यह भी बताएंगे कि सरकार की कार्यक्षमता कितनी है। और बंगाल के 192 सीटों के दावे के पीछे का जोश, क्या सिर्फ राजनीतिक उम्मीद है या वास्तविकता का प्रतिबिंब? इन सवालों के जवाब अभी बाकी हैं।
30 अप्रैल को रिजल्ट आएंगे तो अच्छी बात है, लेकिन क्या सच में सभी छात्रों का डेटा ठीक है? आधार लिंक न होने का बहाना तो हर साल चलता है।
एनसीईआरटी की किताबों पर जोर देना सही है। निजी प्रकाशकों की किताबें महंगी भी हैं और quality गुणवत्ता कम होती है।
192 सीटें? बंगाल में इतना बड़ा बदलाव संभव भी है? लगता है चुनावी जुनून में बयानबाजी बढ़ गई है।
शाला प्रवेश उत्सव अच्छी पहल है। बस यह सुनिश्चित करें कि benefit लाभ वास्तविक जरूरतमंद तक पहुंचे।
बलरामपुर में यूनिफॉर्म कैसे कचरे में मिले? यह गंभीर लापरवाही है। जांच में सख्ती होनी चाहिए।
मंत्री के दोहरे एजेंडे से पता चलता है कि शिक्षा को भी politics राजनीति के औजार के तौर पर देखा जा रहा है।