चुनाव में पराजय हुई मगर जनता की मांग है कि काम करते रहें
बिहार के राजनीतिक दृश्य में एक नया मोड़ आया है। विधान सभा चुनाव में हार के बावजूद, प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाली जन सुराज ने घोषणा की है कि वे लोगों के बीच रहकर work करते रहेंगे। कटिहार में अपने दौरे के दौरान किशोर ने कहा कि चुनाव के समय जनता ने साफ कहा था कि वे उनके activists को समाज में सक्रिय देखना चाहते हैं। इस वादे को निभाते हुए वह पूरे राज्य का भ्रमण कर चुके हैं।
किशोर ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव में vote buying करने के लिए 10,000 रुपये प्रति वोट दिए गए। अब सरकार के पास न तो कर्मचारियों को salary देने के लिए पैसा है, न ही ठेकेदारों को भुगतान करने के लिए। उन्होंने तंज किया कि आम नागरिक फर्जी दस्तावेज़ पर नौकरी ले तो तुरंत एफआईआर हो जाती है, लेकिन जो व्यक्ति फर्जी डिग्री पर विधायक बना, उसे मुख्यमंत्री का पद दे दिया गया।
उन्होंने कहा कि नए मुख्यमंत्री की जन्म तिथि भी स्पष्ट नहीं है। कोर्ट को दिए हलफनामे में वर्ष 1981 बताया गया, लेकिन नेतृत्व पाने के लिए 1968। इस तरह के विरोधाभास के बावजूद कोई action नहीं हुई। किशोर ने कहा कि यह भारतीय लोकतंत्र के लिए concern का विषय है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि 202 से अधिक विधायकों वाली पार्टी के नेता को राज्यसभा भेजा गया, जबकि छोटी पार्टी के नेता को सरकार का नेतृत्व मिला।
किशोर ने CBI report का इंतजार बताया, जो नीट की छात्रा के साथ हुई घटना की जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि रिपोर्ट में पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला, तो जन सुराज हस्तक्षेप करेगी। उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया, लेकिन चेतावनी दी कि भाजपा इसे excuse बनाकर डी-लिमिटेशन के ज़रिए सीमा पुनर्निर्धारण करना चाहती है, जो लोकतंत्र के spirit के खिलाफ है।
इस संपूर्ण भ्रमण का उद्देश्य बिहार को flood-free और ज्ञान की भूमि बनाना है। किशोर ने कहा कि चुनाव हारने का मतलब जनता से जुड़ाव खोना नहीं है। जनता ने जो मांग की है, उसे वे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
सरकार के पास पैसा नहीं है, लेकिन वोट खरीदने के लिए था? cost लागत कहाँ से आई?
जन सुराज का यह move कदम तारीफ के काबिल है, लेकिन क्या जनता वाकई बदलाव चाहती है?
एक तरफ आम आदमी पर फर्जीवाड़े के लिए कार्रवाई, दूसरी तरफ ऐसे नेता को सत्ता में बैठाना — यह hypocrisy दोहरापन कब तक चलेगा?
प्रशांत किशोर बोलते हैं तो अच्छा लगता है, लेकिन क्या वो pressure दबाव बना पाएंगे जिससे कुछ बदले?
पलयान मुक्त बिहार — यह vision दृष्टि पहले क्यों नहीं आई?
अगर नीट की छात्रा को न्याय नहीं मिला, तो जन सुराज क्या do करेंगे? बस बयान देंगे?