इटली ने इसराइल के साथ रक्षा समझौते पर लगाई रोक: यूरोप में बढ़ता दबाव
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने decision लिया है कि इसराइल के साथ रक्षा agreement को अब नहीं बढ़ाया जाएगा। यह समझौता पांच साल के लिए होता था और लंबे समय से चला आ रहा था, लेकिन मेलोनी ने कहा कि current situation को देखते हुए इसके नवीकरण को निलंबित किया गया है। इस कदम के पीछे लेबनान में इसराइली सैनिक कार्रवाई और इटली के शांति बलों पर की गई कार्रवाई का तनाव भी शामिल है।
इटली ने हाल ही में इसराइली राजदूत को तलब किया था जब लेबनान में एक संयुक्त राष्ट्र काफिले पर warning shots चलाई गईं, जिसमें इतालवी वाहन को नुकसान पहुंचा था। इसके बाद इसराइल ने भी इटली के राजदूत को तलब कर विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी की उन unacceptable attacks के बारे में टिप्पणी के लिए आपत्ति दर्ज कराई जिन्हें उन्होंने लेबनान में नागरिकों पर होते बताया।
इटली इसराइल को हथियार निर्यात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश है, हालांकि 2021 से 2025 के बीच इसका योगदान सिर्फ 1.3% रहा। अमेरिका और जर्मनी इसराइल के प्रमुख सैन्य suppliers हैं। इसलिए इटली का यह move सैन्य दृष्टि से छोटा है, लेकिन राजनयिक pressure के तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इटली के विपक्षी दल लंबे समय से इसराइल के साथ हथियारों के सौदे को लेकर आपत्ति जता रहे थे। लाखों नागरिक protests में उतरे, खासकर गाजा में हालात के खिलाफ। इस public trust के दबाव में मेलोनी की सरकार ने यह निर्णय लिया है। यह कदम यूरोप में बढ़ते मानवीय चिंता के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।
इसराइली विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह समझौता वैसे ही एक पुराना understanding था जिसमें कोई concrete content नहीं थी। उनके मुताबिक, इससे उनकी सुरक्षा पर कोई impact नहीं पड़ेगा। लेकिन इटली की ओर से यह संकेत साफ है कि अब मित्र देश भी नीतिगत response के जरिए इसराइल की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं।
इतनी छोटी हथियार आपूर्ति में रोक लगाने से इसराइल को क्या फर्क पड़ेगा? यह तो सिर्फ symbolic move प्रतीकात्मक कदम है।
अमेरिका और जर्मनी के बाद इटली का ऐसा stand रुख दिखाना महत्वपूर्ण है। यह दबाव बनाता है।
इतालवी शांति सैनिकों पर गोलीबारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसमें संप्रभुता का मसला है।
1.3% आपूर्ति छोटी है, लेकिन यह राजनीतिक message संदेश देता है कि यूरोप एकजुट हो रहा है।
क्या इससे लेबनान में नागरिकों की सुरक्षा में real change वास्तविक बदलाव आएगा? या यह सिर्फ एक राजनीतिक घोषणा है?
इटली की सरकार ने public opinion जनमत के दबाव में कदम उठाया। सड़कों पर आए लोगों की आवाज सुनाई दी।