युद्ध की आग के बीच सुलह की कोशिश: इजरायल-लेबनान के बीच दो घंटे चली सीधी वार्ता

इजरायल और लेबनान के बीच युद्ध के बीच बातचीत की एक नई कोशिश सामने आई है। मंगलवार को वाशिंगटन में दोनों देशों के राजनयिकों ने दो घंटे से अधिक direct talks की। यह बैठक तब हुई जब लेबनान में ईरान समर्थित सशस्त्र समूह हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल का military campaign जारी था। इस बातचीत को लेकर अमेरिका ने कहा कि यह meaningful discussions का हिस्सा रही और दोनों पक्ष आगे भी बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए।

इजरायली राजदूत येचिएल लीटर ने बैठक के बाद बताया कि दोनों देश लेबनान पर ईरान के बढ़ते influence को कम करने में एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि यह बैठक हिजबुल्लाह को defeat के एक नए प्रयास की शुरुआत है। दोनों देश जल्द ही एक joint statement भी जारी कर सकते हैं। यह बातचीत इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि इजरायल और लेबनान के बीच कोई आधिकारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं और 1948 के बाद से वे hostile बने हुए हैं।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने स्पष्ट किया कि यह कोई एक दिन की घटना नहीं है, बल्कि एक लंबी process की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में हिजबुल्लाह के 20 से 30 साल के presence को समाप्त करना आसान नहीं होगा। लेबनानी राजदूत नाडा हमादेह मोअवाद ने बैठक के बाद कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन उनकी उपस्थिति खुद एक महत्वपूर्ण संकेत है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हिजबुल्लाह लेबनान के दक्षिणी और पूर्वी इलाकों के साथ-साथ बेरूत के दक्षिणी suburbs पर मजबूत नियंत्रण रखता है। लेबनान सरकार के पास इस समूह पर कोई सीधा control नहीं है और न ही हिजबुल्लाह ने इस बातचीत में भाग लिया है। लंबे समय से वह इजरायल के साथ किसी भी तरह की सीधी बातचीत का opposition करता रहा है।

इस बातचीत के तीन मुख्य issues हैं: पहला, इजरायल और लेबनान के बीच सैन्य टकराव; दूसरा, ईरान का परमाणु कार्यक्रम; और तीसरा, होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण। अगर इस प्रक्रिया में दबाव कम होता है और peace की राह निकलती है, तो यह पूरे क्षेत्र के लिए एक बड़ी relief हो सकती है। लेकिन अभी तक कुछ भी अंतिम नहीं है।

प्रतिक्रियाएँ 6

  • राजीव

    इजरायल के लिए यह बड़ा राजनीतिक risk है। क्या वे वाकई शांति चाहते हैं या सिर्फ दुनिया को यह दिखाना चाहते हैं कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं?

  • मीनल

    लेबनान सरकार के पास हिजबुल्लाह पर control नहीं है, फिर भी इजरायल उससे बात कर रहा है? यह सब एक दिखावा है।

  • अर्पण

    संयुक्त बयान आएगा या नहीं, लेकिन यह बातचीत खुद एक बड़ा step है। दशकों से न बोलने वाले देश अब बात कर रहे हैं।

  • साक्षी

    अमेरिका की भूमिका यहाँ crucial है। वे न सिर्फ मध्यस्थ हैं, बल्कि इस पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए दबाव भी डाल रहे हैं।

  • विक्रम

    हिजबुल्लाह के बिना कोई समाधान संभव नहीं है। क्या असल में लेबनान सरकार उस पर pressure डाल सकती है?

  • तनु

    इस तरह की बातचीत से hope बंधती है, लेकिन इतिहास कहता है कि इस क्षेत्र में शांति बहुत कम रही है।

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

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