‘अभी तो विधायक भी टूटेंगे’: केजरीवाल पर भारी पड़ रहा भरोसे का संकट?
धोखा दिया गया है — यही आरोप पटना में पूर्व मंत्री रामकृपाल यादव ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ लगाया है। उनका कहना है कि केजरीवाल ने न केवल जनता और अपने workers को धोखा दिया है, बल्कि पार्टी के भीतर लंबे समय से चले आ रहे असंतोष को अब खुलकर देखा जा रहा है। आम आदमी पार्टी के भीतर बगावत की खबरें आने के बीच, यादव ने चेतावनी दी है कि पार्टी में बड़ा संकट आ गया है। क्या वाकई अब राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं?
यादव ने भ्रष्टाचार के आरोपों को भी दोहराया और केजरीवाल के खिलाफ ‘loot ’ और ‘गलत काम’ करने का आरोप लगाया। उन्होंने ‘शीश महल’ जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि यह waste जनता के पैसे की है। इससे लोगों का भरोसा टूट गया है — एक ऐसा भरोसा जो राजनीति में बनाए रखना सबसे मुश्किल होता है।
लेकिन यही नहीं। यादव ने एक बड़ा prediction किया है: आने वाले दिनों में कई बड़े नेता, विधायक और सांसद भी पार्टी छोड़ सकते हैं। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि केजरीवाल की राजनीतिक पकड़ कमजोर हो रही है। क्या यह एक राजनीतिक भूकंप की शुरुआत है? या सिर्फ एक विरोधी का निशाना?
आम आदमी पार्टी ने अभी तक इन आरोपों पर कोई official response नहीं दी है। इस चुप्पी ने हालात को और heated कर दिया है। जब आरोप गूंजते हैं और जवाब नहीं आता, तो अटकलें अपने आप बढ़ जाती हैं। यादव के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में discussions तेज हो गई है। क्या आपम के भीतर असली दरार आ गई है? या यह सिर्फ चुनावी मौसम की रणनीति है?
workers कार्यकर्ता तो पहले ही थक चुके हैं, अब नेता भी जा रहे हैं?
शीश महल का मुद्दा अब भी गर्म है? ये भ्रष्टाचार की बातें तो हर पार्टी करती है।
अगर भरोसा टूट गया है, तो वापस लाना मुश्किल होगा। यह विश्वास का संकट है।
रामकृपाल यादव के बयान से अटकलें जरूर बढ़ेंगी।
एक तरफ आरोप, दूसरी तरफ चुप्पी। जनता को पता कैसे चलेगा कि सच क्या है?
ये सब राजनीति है, भाई। कल वही लोग वापस आ जाएंगे जब पकड़ मजबूत होगी।
केजरीवाल के खिलाफ आवाजें बढ़ रही हैं, लेकिन कार्यकर्ता की भावनाएं क्या हैं?