ईरान में सत्ता परिवर्तन? IRGC ने राष्ट्रपति को किया किनारे, मोजतबा के इर्द-गिर्द कड़ा सुरक्षा घेरा
ईरान में नागरिक authorities और शक्तिशाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बीच tensions लगातार बढ़ रहा है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, IRGC ने राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की महत्वपूर्ण appointments को रोक दिया है और सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के चारों ओर tightened सुरक्षा घेरा बना दिया है, जिससे निर्वाचित सरकार की उन तक access लगभग खत्म हो गई है।
फॉक्स न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ने नए खुफिया मंत्री की नियुक्ति करने की कोशिश की, लेकिन IRGC कमांडर अहमद वाहिदी के pressure में सभी उम्मीदवार खारिज कर दिए गए। वाहिदी का तर्क है कि युद्धकालीन conditions में महत्वपूर्ण पदों का प्रबंधन सीधे रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा होना चाहिए। इस हस्तक्षेप ने नागरिक governance की शक्तियों को नाटकीय रूप से weakened कर दिया है।
स्थिति और भी serious हो गई है क्योंकि अब IRGC सर्वोच्च नेता तक होने वाले communication को भी नियंत्रित कर रहा है। एक वरिष्ठ सैन्य परिषद अब उन तक पहुंचने वाली सभी जानकारियों को filters करती है, जिसके कारण राष्ट्रपति की रिपोर्टें और अनुरोध खामेनेई तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे पेजेशकियान completely अलग-थलग हो गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कोई अचानक तख्तापलट नहीं, बल्कि ईरान की power structure में धीमे लेकिन स्थायी shift का हिस्सा है। जैसे-जैसे IRGC ने अपने सुरक्षा तंत्र को strengthened किया है, नागरिक संस्थानों की भूमिका कम होती गई है।
इसके अलावा, उत्तराधिकार को लेकर भी tensions चल रही है। पूर्व अधिकारी अली असगर हेजाजी ने मुजतबा खामेनेई के उत्तराधिकारी बनने का विरोध किया था, चेतावनी देते हुए कि ऐसा होने से control पूरी तरह रिवोल्यूशनरी गार्ड के हाथों में चला जाएगा। वर्तमान स्थितियां इस डर को सही साबित करती प्रतीत हो रही हैं।
इस पूरे situation मामले में राष्ट्रपति बिल्कुल बेबस लग रहे हैं। क्या IRGC अब वास्तविक power शक्ति है?
खामेनेई के उत्तराधिकार पर इतना तनाव तो समझ आता है, लेकिन civilian नागरिक संस्थाओं का किनारा करना खतरनाक संकेत है।
ये सिर्फ internal आंतरिक तनाव नहीं, बल्कि ईरान की foreign policy विदेश नीति को भी सख्त बना सकता है।
IRGC का दबाव इतना ज्यादा है कि राष्ट्रपति की decisions नीतियां भी अब बेअसर लग रही हैं।
क्या ईरान में लोकतंत्र सिर्फ एक बहाना बनकर रह गया है?
अगर ऐसे ही चला, तो आने वाले years सालों में IRGC का influence प्रभाव और बढ़ेगा।