ईरान की सेना से आसिम मुनीर का पुराना नाता, टेंशन में आ गया अमेरिका; शांति वार्ता पर मंडराया खतरा
ईरान की सेना से आसिम मुनीर का पुराना नाता, टेंशन में आ गया अमेरिका; peace talks पर मंडराया खतरा। फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की भूमिका में पाकिस्तान के सेनाप्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के शामिल होने से अमेरिकी खुफिया एजेंसियां deeply चिंतित हैं। उनके ईरान के military leadership के साथ लंबे समय से चले आ रहे संबंध उनकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
हाल ही में मुनीर ने ईरान की तीन दिन की आधिकारिक यात्रा पूरी की, जहां उन्होंने राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और खतम उल अंबिया कमांडर मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही से direct talks की। पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा आईएसपीआर ने कहा कि उद्देश्य regional stability को बढ़ावा देना था। लेकिन यह यात्रा अमेरिकी नजरिए में संदिग्ध है, क्योंकि मुनीर पहले भी ईरान की कुद्स फौज के चीफ कासिम सुलेमानी के करीब माने जाते रहे हैं।
फाउंडेशन फॉर डिफेंस डेमोक्रेसीज के विश्लेषक बिल रोगियो ने कहा कि पाकिस्तान की सेना न तो ईरान के प्रति पूरी तरह aligned है और न ही अमेरिका के प्रति। वे बोले, "यह देश मौकापरस्त है।" उनका मानना है कि जब तक पाकिस्तानी सेना के strategic interests ईरान के साथ जुड़े रहेंगे, वार्ता के माध्यम से स्थायी conflict resolution मुश्किल होगा।
अमेरिका के लिए चिंता का कारण यह है कि मुनीर न केवल एक सैन्य नेता हैं, बल्कि वार्ता प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने उनकी तारीफ की है, लेकिन अब उनके अतीत के संबंधों को लेकर growing skepticism अमेरिकी नीति निर्माताओं के बीच दिख रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि मध्यस्थता में credibility नहीं होगी, तो युद्धविराम भी अस्थायी रह सकता है।
इस संदर्भ में पाकिस्तान की भूमिका अस्पष्ट बनी हुई है। एक ओर वह अमेरिका के साथ सैन्य संबंध बनाए रखना चाहता है, तो दूसरी ओर ईरान के साथ क्षेत्रीय समझौते के लिए तैयार है। आसिम मुनीर की वर्तमान गतिविधियां इसी delicate balance को उजागर करती हैं। अगले दौर की वार्ता कब होगी, यह अभी अनिश्चित है, लेकिन इस बात की चर्चा है कि क्या पाकिस्तान वाकई neutral ground की भूमिका निभा सकता है।
अमेरिका को इतना दिमाग़ क्यों दिख रहा है? अगर वार्ता से regional peace क्षेत्रीय शांति आती है, तो फिर क्या फर्क पड़ता है कि मध्यस्थ कौन है?
मुनीर ईरान के साथ संबंध छुपाने की कोशिश नहीं कर रहे। लेकिन अमेरिका को उनकी निकटता से strategic concern रणनीतिक चिंता है।
पाकिस्तान हमेशा से opportunistic मौकापरस्त रहा है। आज अमेरिका, कल ईरान।
क्या अमेरिका खुद को नैतिक अधिकार देने वाला एकमात्र देश मानता है?
अगर मुनीर ईरान के सैन्य अधिकारियों के करीब रहे हैं, तो फिर impartial mediator निष्पक्ष मध्यस्थ कैसे हो सकते हैं?
देखो, ये सब geopolitical chess भू-राजनीतिक शतरंज है। कोई भावना नहीं, बस हित।
आईएसपीआर का बयान साफ था: cooperative measures सहयोगात्मक उपाय पर जोर। लेकिन कार्यान्वयन कैसे होगा?
अमेरिका को डर है कि ईरान को diplomatic edge राजनयिक बढ़त मिल जाएगी।