दूसरे दौर की शांति वार्ता में ईरान क्यों लगा रहा अड़ंगा? सीजफायर टूटा तो क्या होगा नतीजा
इस्लामाबाद में होने वाली second round की शांति वार्ता पर ईरान के hesitation लगाने के पीछे गहरे राजनयिक और strategic तनाव छिपे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का ceasefire खत्म होने वाला है, और अब तक न तो बैठक की तारीख स्पष्ट है और न ही ईरान के अधिकारी पाकिस्तान पहुंचे हैं। ट्रंप के झूलते statements और ईरानी नेताओं के सख्त रुख ने पूरी प्रक्रिया को uncertain बना दिया है।
ईरान का मुख्य objection अमेरिकी नौसेना द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर naval blockade के खिलाफ है। उनका आरोप है कि अमेरिका ने ceasefire terms का उल्लंघन करते हुए ईरानी झंडे वाले एक cargo ship को जब्त कर लिया, जिसे तेहरान ने piracy घोषित कर दिया। अमेरिका का कहना है कि जहाज नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा था। यह घटना विश्वास की क्षरण को बढ़ा रही है।
पिछले दौर की वार्ता में ईरान ने कई demands रखी थीं — इजरायल द्वारा attacks पर रोक, 6 बिलियन डॉलर की frozen assets की वापसी, नाभिकीय कार्यक्रम पर international guarantee , और होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूली। लेकिन अब तक इनमें से कोई भी demand पूरी नहीं हुई, जिससे ईरान का reluctance करना समझ में आता है।
अंतरराष्ट्रीय markets भी इस अनिश्चितता से vulnerable हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 95 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, और एसएंडपी, डॉउ जॉन्स जैसे सूचकांकों में गिरावट आई है। विशेषज्ञों का warning देना है कि अगर होर्मुज मुद्दा सुलझता नहीं, तो वैश्विक energy supply को गंभीर अव्यवस्था का सामना करना पड़ सकता है।
अगले 24 घंटे critical हो सकते हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर कालीबाफ के इस्लामाबाद पहुंचने की संभावना है। अल-जजीरा के अनुसार, एक interim agreement हो सकता है जो सीजफायर को बढ़ाए और बातचीत को आगे बढ़ाए। लेकिन ट्रंप ने साफ कहा है — अगर बात नहीं बनी, तो tensions बढ़ेगा और bombing फिर शुरू होगी।
क्या वाकई ईरान बातचीत चाहता है या बस time समय खींच रहा है? उनका nuclear program परमाणु कार्यक्रम तो अब भी अंतरराष्ट्रीय सवालों में है।
तेल की कीमतों में उछाल से inflation महंगाई और बढ़ेगी। यह सिर्फ ईरान-अमेरिका का मामला नहीं, global economy वैश्विक अर्थव्यवस्था भी झटके में है।
हर बार ceasefire breaks संघर्ष विराम टूटने पर आम लोगों की lives जिंदगी दांव पर लग जाती है। राजनेता क्यों नहीं समझते?
अमेरिका का pressure tactic दबाव डालने का तरीका और ईरान का defiance आमना-सामना — यह चक्र कब तक चलेगा?
अगर होर्मुज पर बंदी आई, तो पेट्रोल के दाम कहां तक जा सकते हैं? fuel prices ईंधन की कीमतें पहले से ही आसमान छू रही हैं।
क्या सच में जहाज पर छापा मारना legitimate वैध था या बस provocation उकसावे का हिस्सा?