पश्चिम एशिया में तनाव घटा: ईरान ने सभी देशों के लिए खोला होर्मुज, दुनिया ने ली राहत की सांस
पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे tensions में अब राहत की किरण दिखाई दे रही है। इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिन के युद्धविराम के बाद, ईरान ने all countries के वाणिज्यिक जहाजों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल दिया है। इस फैसले की पुष्टि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर की, जिसने वैश्विक relief की सांस लेने का माहौल बनाया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कदम का welcome किया, लेकिन स्पष्ट किया कि ईरान के तेल से जुड़े जहाजों पर अमेरिकी blockade जारी रहेगी जब तक पूर्ण समझौता नहीं होता। ईरान ने चेतावनी दी है कि हालात बदलने पर वह होर्मुज को फिर से close कर सकता है। ट्रंप ने लेबनान पर बमबारी पर प्रतिबंध की घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिका हिजबुल्ला से "उचित तरीके से" निपटेगा।
इस कूटनीतिक बदलाव के बाद वैश्विक markets में भी उछाल आया। कच्चे तेल की कीमतों में 13 फीसदी की drop आई और यह 86 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह खबर बड़ी relief लेकर आई है, क्योंकि उसकी 80 से 85 फीसदी तेल की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है।
पिछले 49 दिनों के संकट के कारण भारत को ऊर्जा आपूर्ति पर pressure का सामना करना पड़ा। पेट्रोल और डीजल की खपत प्रभावित हुई और सरकारी तेल कंपनियों को करोड़ों का loss उठाना पड़ा। इसके अलावा, 24 भारतीय जहाज होर्मुज में फंसे थे, जिनमें से अब तक नौ को निकाला जा चुका है।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा अब एक बड़ी priority बन गई है। वर्तमान में 15 जहाज और सैकड़ों नाविक अभी भी वहां हैं। इस घटनाक्रम ने न केवल क्षेत्रीय security को प्रभावित किया है, बल्कि वैश्विक व्यापार मार्गों के भविष्य पर भी गहरा प्रश्नचिह्न खड़ा किया है।
अंतरराष्ट्रीय trade व्यापार के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा तब होता है जब यह बंद हो जाए।
ट्रंप शांति का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन नाकेबंदी जारी रखना pressure दबाव बनाए रखने की रणनीति है।
भारत के लिए यह बहुत बड़ी राहत है, लेकिन फंसे नाविकों की स्थिति सुनकर worry चिंता होती है।
ईरान ने खोल तो दिया, लेकिन चेतावनी भी दे दी। यह खुला धमकी जैसा नहीं लगता?
तेल की कीमतों में drop गिरावट ने बाजार में तुरंत असर दिखाया। भारत की मुद्रा पर भी दबाव कम होगा।
क्या यह सच में शांति की शुरुआत है, या सिर्फ एक temporary अस्थायी राहत? परमाणु मुद्दा अभी भी खुला है।