बिस्तर पर रहा साल भर, पर नहीं डिगा हौसला; कैंसर से लड़ते हुए आरव वत् ने CBSE में लहराया परचम

एमिटी इंटरनेशनल स्कूल, साकेत के student आरव वत्स ने कैंसर के कठिन treatment के दौरान भी हौसला नहीं छोड़ा और सीबीएसई की secondary exam में 96.6% अंक हासिल किए। उनकी कहानी सिर्फ एक शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि courage , patience और अटूट विश्वास की मिसाल है।

2022 में लिम्फोब्लास्टिक लिम्फोमा का diagnosis होने के बाद आरव कई treatment जैसे कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और स्पाइन सर्जरी से गुजरे। एक समय ऐसा भी आया जब वह पूरे एक साल तक bed पर रहे। लेकिन उन्होंने कभी hope नहीं छोड़ी और धीरे-धीरे फिजियोथेरेपी के जरिए चलना फिर से सीखा।

आरव ने बिना किसी coaching के यह सफलता पाई। इलाज के दौरान भी वे self-study पर टिके रहे। उन्होंने गूगल और यूट्यूब से अवधारणाओं को समझा और अपने teachers के समर्थन से पढ़ाई जारी रखी। उनके पिता डॉ. अजय वत्स कहते हैं कि स्थिति के बावजूद बेटे ने positive रहने का फैसला किया था।

आरव को पेंटिंग, ड्राइंग और गिटार बजाने का hobby है। ये गतिविधियां उन्हें मानसिक रूप से strong बनाए रखने में मदद करती हैं। वे प्रेरणादायक कहानियां पढ़ना पसंद करते हैं और हर दिन को एक नई hope के साथ जीते हैं। उनका मानना है कि हर मुश्किल किसी reason से आती है और हमें उससे सीखकर आगे बढ़ना चाहिए।

आरव ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, दादा-दादी, प्रिंसिपल दिव्या भाटिया और अपने support करने वाले शिक्षकों को दिया है। वे डॉक्टर बनने की इच्छा रखते हैं ताकि वे उन लोगों की help कर सकें जो बीमारी की लड़ाई लड़ रहे हैं।

प्रतिक्रियाएँ 6

  • साहस_की_कहानी

    एक साल बिस्तर पर रहने के बाद भी इतने अच्छे अंक लाना... यह सिर्फ दिमाग नहीं, बल्कि mental strength का भी सवाल है।

  • अमन_दिल्ली

    बिना कोचिंग के 96% लाना किसी के लिए भी बड़ी बात होती, लेकिन कैंसर के इलाज के बीच में यह करना तो चमत्कार से कम नहीं। सम्मान है आरव को।

  • माँ_की_बात

    एक माँ के तौर पर मैं सोच भी नहीं सकती कि ये सब कैसे झेला होगा। लेकिन उनके पिता ने सही कहा — positive रहना जरूरी है।

  • राज_शर्मा

    हम तो एक छोटी सी जुकाम में भी पढ़ाई छोड़ देते हैं। ये लड़का तो कीमोथेरेपी के बीच में भी पढ़ता रहा। huge respect

  • नीतू_सिंह

    क्या पता, एक दिन आरव वो डॉक्टर बनेंगे जो कैंसर के मरीजों के लिए नई दवा ढूंढेंगे। hope करती हूँ।

  • बुद्धिजीवी

    स्कूलों को ऐसे छात्रों की कहानियां कक्षा में सुनानी चाहिए। यही real education है — हार न मानना।

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

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