अमेरिका-ईरान वार्ता फेल हुई? महबूबा मुफ्ती ने कहा—यह तो बस शुरुआत है
जम्मू-कश्मीर की पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने हालिया अमेरिका-ईरान वार्ता के असफल होने की खबरों को failure नहीं, बल्कि एक लंबी प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। पुलवामा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह बातचीत अभी भी जारी है, और time के साथ रंग ला सकती है। उन्होंने कहा, 'वो समय जरूर आएगा जब कामयाबी मिलेगी। हमें patience रखना चाहिए और दुआ करनी चाहिए।'
मुफ्ती ने ईरान की तारीफ करते हुए कहा कि उसने अपने principles पर मजबूती से खड़े रहकर अपनी हिम्मत दिखाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका चाहता था कि ईरान वह सब कुछ छोड़ दे जो उसने अपने लोगों के खून और बलिदान से हासिल किया है। उन्होंने कहा, 'भला ऐसा कैसे हो सकता था?' उन्होंने खुशी जताई कि ईरान अपनी स्थिति पर कायम रहा और अमेरिका खाली हाथ लौटा।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि बातचीत के दौरान 15 दिन के ceasefire में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है। जब भी वार्ता शुरू होती है, दोनों पक्ष कठोर stance अपनाते हैं। उन्होंने आशा जताई कि दुनिया भर के लोग इस बातचीत की सफलता चाहते हैं, क्योंकि global economy ठप हो गई है, ऊर्जा की कीमतें आसमान छू रही हैं, और व्यापार रुक गया है।
महबूबा ने बातचीत के महत्व को होर्मुज जलडमरूमध्य के संदर्भ में समझाया, जहां तनाव के कारण जहाजों का आवागमन प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि एक दिन यह मार्ग फिर से खुलेगा और बातचीत के माध्यम से शांति संभव है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्रक्रिया में haste नहीं की जानी चाहिए।
इसी क्रम में, महबूबा ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि वे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर delay से प्रतिक्रिया देते हैं, जो निराशाजनक है। उन्होंने उमर अब्दुल्ला को राज्य के एकमात्र मुस्लिम मुख्यमंत्री होने के बावजूद चुप्पी साधने के लिए निशाना बनाया। उनके अनुसार, जनता की बजाय पीडीपी पर हमले करने में ही उमर अब्दुल्ला व्यस्त रहते हैं।
ईरान को दबाव में लाना आसान नहीं है, लेकिन global economy वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए यह बातचीत जरूरी थी।
महबूबा सही कह रही हैं—patience सब्र रखना जरूरी है। लेकिन क्या अमेरिका वाकई शांति चाहता है?
हर बातचीत के बाद ऊर्जा की prices कीमतें बढ़ती हैं। आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा, यही सवाल है।
उमर अब्दुल्ला पर आलोचना बेबुनियाद नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चुप रहना concern चिंता की बात है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण का मतलब है energy ऊर्जा की आपूर्ति पर अधिकार। इसलिए यह वार्ता इतनी महत्वपूर्ण है।
क्या वाकई बातचीत जारी है? या दोनों तरफ से सिर्फ posturing रुख दिखाना चल रहा है?