व्याख्या: ईरान की लीडरशिप में फूट! IRGC के दखल से संसद परेशान और मुज्तबा का पता नहीं, क्या बिखर जाएगी सत्ता?
ईरान में leadership के भीतर गहरा विभाजन दिखाई दे रहा है। एक ओर सरकारी घोषणाएँ diplomacy और बातचीत की ओर झुकती हैं, तो दूसरी ओर इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) सैन्य response और दृढ़ रुख पर अड़ा है। अमेरिकी थिंकटैंक इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) ने इसे 'शासन के भीतर गंभीर लड़ाई' बताया है। यह विभाजन केवल सत्ता के बीच तनाव नहीं, बल्कि युद्ध के बाद के नए power balance का भी संकेत है।
इस rift का सबसे तेज़ प्रकटीकरण अप्रैल 2026 में हुआ, जब विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य commercial shipping के लिए पूरी तरह खुला है। यह कूटनीति की ओर एक लचीला कदम था। लेकिन लगभग तुरंत, IRGC की नौसेना ने संदेश भेजा कि जलडमरूमध्य अभी भी बंद है और जहाजों को उनकी अनुमति की आवश्यकता होगी। यह conflicting signal अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बन गया।
इस संघर्ष में प्रमुख नाम संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ हैं, जो बातचीत के पक्षधर हैं, और IRGC के कमांडर मेजर जनरल अहमद वाहिदी, जो किसी भी समझौते को weakness मानते हैं। वाहिदी के पास सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई तक सीधी पहुँच होने की रिपोर्ट है, जिससे उनकी स्थिति और मजबूत होती है। वहीं, गालिबाफ और अराघची डरते हैं कि अगर IRGC का control बढ़ा, तो उनकी स्थिति खतरे में पड़ सकती है।
सुप्रीम लीडर की health और उनकी उपस्थिति पर उठ रहे सवाल भी इस तनाव को बढ़ा रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि मुज्तबा खामेनेई कोम में हैं और कई अधिकारी उनसे सीधे संपर्क नहीं कर पा रहे, जिससे नीतिगत decision-making में देरी हो रही है। यह शक्ति रिक्तता IRGC के लिए अपना दखल बढ़ाने का अवसर बन रही है।
हालाँकि, कुछ विश्लेषक मानते हैं कि यह व्यवस्था के टूटने का संकेत नहीं, बल्कि युद्ध के बाद की एक tactical debate है। IRGC का बढ़ता प्रभाव डिप्लोमेसी को चुनौती दे रहा है, लेकिन बाहरी दबाव और आर्थिक संकट के बीच, गालिबाफ जैसे व्यावहारिक नेता अभी भी एक स्थायी समझौते की उम्मीद लिए खड़े हैं। ईरान की दिशा अब इस आंतरिक tension के परिणाम पर निर्भर करती है।
IRGC का बढ़ता नियंत्रण देखकर लगता है कि civilian नागरिक नेतृत्व अब पीछे धकेल दिया जा रहा है।
अगर सुप्रीम लीडर की सेहत ठीक नहीं है, तो यह power vacuum शक्ति रिक्तता कभी भी बड़ा संकट बन सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य केवल ईरान के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की energy supply ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम है।
इस तरह के आंतरिक झगड़े कमजोर दिखते हैं, लेकिन बाहरी शत्रुओं के खिलाफ unity एकता बनाए रखने की रणनीति भी हो सकती है।
अराघची की घोषणा के बाद IRGC का विरोध दिखाता है कि विदेश नीति पर भी उनका influence प्रभाव है।
संसद में हार्डलाइनर्स का बढ़ता दबाव डरावना है। वे हर समझौते को surrender आत्मसमर्पण मानते हैं।
अगर यह फूट बढ़ी, तो क्या ईरान वास्तव में अपने internal conflict आंतरिक संघर्ष से आग लग सकता है?