वसुंधरा राजे के कथित पत्र वायरल करने के आरोप में मध्य प्रदेश कांग्रेस के IT सेल के तीन कार्यकर्ता भोपाल में गिरफ्तार
वसुंधरा राजे के एक कथित पत्र के वायरल होने के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस के आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को भोपाल से गिरफ्तार कर लिया गया है। यह पत्र महिला आरक्षण विधेयक के संशोधन के बाद आया, जिसमें परिसीमन को जोड़ने पर concern को उठाया गया था। राजे ने खुद इस पत्र को फर्जी बताते हुए social media पर लिखा कि यह 'शुभचिंतकों' की कारगुजारी है।
गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं के नाम उदय, निखिल और बिलाल बताए जा रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि इन्हें बिना किसी उचित कारण के detention में रखा गया और बाद में गिरफ्तार किया गया। राज्य के विभिन्न नेताओं ने भोपाल के एमपी नगर थाने सहित कई स्थानों पर जानकारी मांगी, लेकिन उन्हें कोई official information नहीं दी गई।
कांग्रेस ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। राज्य सभा सदस्य विवेक तन्खा ने कहा कि पत्र को लाखों लोगों ने देखा और शेयर किया, फिर भी उसके प्रसार के लिए सिर्फ कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई की गई। उन्होंने इसे undemocratic बताते हुए हाई कोर्ट में चुनौती देने की बात कही।
प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा कि राजे का पत्र अवैध परिसीमन के षड्यंत्र की ओर serious indication करता है, और इसे साझा करने पर कार्रवाई करना स्वतंत्र public discourse को दबाने के समान है।
मध्य प्रदेश पुलिस ने अभी तक गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है, जिससे और भी अधिक confusion पैदा हुआ है। कांग्रेस का दावा है कि यह राजस्थान पुलिस के नाम पर की गई कार्रवाई है। इस पूरे मामले में पुलिस की response की कमी और स्पष्टता का अभाव संस्थागत पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अगर यह पत्र फर्जी है, तो उसे शेयर करने वाले हजारों लोगों के खिलाफ क्यों नहीं कार्रवाई की गई? सिर्फ तीन कांग्रेसी कार्यकर्ताओं पर क्यों? यह selective targeting चयनित निशाना लग रहा है।
पुलिस को गिरफ्तारी की जानकारी नहीं? यह कैसी transparency पारदर्शिता है? ऐसे में लोगों का trust विश्वास कैसे बनेगा?
वसुंधरा राजे ने खुद कहा कि यह पत्र फर्जी है, फिर भी इसके आधार पर कार्रवाई? यह सिर्फ political pressure राजनीतिक दबाव दिखाने की कोशिश है।
इस तरह की गिरफ्तारी से आम आदमी का अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर खतरा है।
अगर पत्र में गलत जानकारी थी, तो उसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन शेयर करने वालों को दंडित करना नहीं। यह सुन्न करने वाला प्रभाव डालता है।
क्या राजस्थान पुलिस के पास मध्य प्रदेश में गिरफ्तार करने का अधिकार है? यह तो कानून की बुनियादी बात है।