योगी कैबिनेट विस्तार को जल्द मिल सकती हरी झंडी; PM मोदी और नितिन नवीन से मिले यूपी बीजेपी अध्यक्ष
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल विस्तार पर जल्द फैसला होने वाला है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से दिल्ली में लगातार meeting की हैं, जिनमें यूपी की राजनीति, political balance और आगामी नियुक्तियों पर गहन चर्चा हुई। यह माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल में छह रिक्त पदों को भरे जाने के साथ ही पार्टी की राज्य संगठन टीम भी नई होगी।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, feedback में प्रमुखता से कहा गया है कि विस्तार में सामाजिक और क्षेत्रीय representation को सुधारा जाए। अवध क्षेत्र में पासी और कुर्मी समुदाय की नाराजगी के साथ-साथ ब्राह्मण वर्ग की भी dissatisfaction बढ़ रही है। इसलिए सुझाव दिया गया है कि यदि भाजपा backward politics पर ध्यान केंद्रित कर रही है, तो अगड़े वर्गों को भी शामिल किया जाए ताकि social fabric मजबूत रहे।
इस बीच, विनोद तावड़े जैसे राष्ट्रीय नेताओं ने लखनऊ दौरे के दौरान वरिष्ठ नेताओं से बंद कमरे में private meeting की और स्थानीय स्तर की ground reality का आकलन किया। उनकी रिपोर्ट के आधार पर अंतिम निर्णय लिए जा रहे हैं। अभी तक की प्रक्रिया के मुताबिक, मंत्रिमंडल विस्तार के बाद autonomous bodies जैसे आयोग, निगम और बोर्डों के खाली पदों को भरे जाने की योजना है।
वर्तमान में योगी मंत्रिमंडल में 54 मंत्री हैं और छह पद रिक्त हैं। इन पदों को भरने के साथ ही नई राज्य पार्टी कमेटी का भी गठन होना है। लगभग तीन दर्जन vacant positions स्वायत्त निकायों में पहले से ही लंबित हैं। पार्टी के भीतर सक्रियता तेज है और यह स्पष्ट है कि leadership चुनावी राजनीति के लिए सामाजिक equation को फिर से जोड़ना चाहता है।
यूपी में हर विस्तार के बाद जाति का दायरा बढ़ता है। क्या वाकई governance शासन सुधरेगा या सिर्फ political gain राजनीतिक फायदा?
ब्राह्मण, पासी, कुर्मी — सबकी बात हो रही है, लेकिन यादव और दलितों का inclusion समावेश कब होगा?
अवध क्षेत्र की नाराजगी अब पूरे प्रदेश में impact प्रभाव डाल रही है। विस्तार सिर्फ एक नंबर नहीं, healing उपचार का मौका है।
मंत्री बनने के लिए अब meeting मीटिंग नहीं, feedback फीडबैक देना जरूरी है।
छह पद खाली हैं या 60? कभी vacancy खालीपन खत्म होगा? निगमों में काम कौन करेगा?
पंकज चौधरी दिल्ली में डेरा डाले हैं तो फैसला निकट है। वैसे, क्या पीएमओ की मंजूरी के बिना कोई decision फैसला हो सकता है?