निदा खान की भूमिका 'जबरन मतांतरण' से जुड़ी: पुलिस
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की कर्मचारी निदा खान को नासिक में चल रही sexual harassment और forced conversion की जांच में प्रमुख आरोपित के तौर पर नामित किया गया है। पुलिस ने कहा है कि उसकी भूमिका इस case में सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। वह अभी फरार है और पुलिस उसकी तलाश में है।
सत्र न्यायालय ने निदा को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उसकी अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई की तारीख 27 अप्रैल तय की गई। इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि निदा समेत पांच आरोपितों के खिलाफ नौ एफआइआर दर्ज की गई हैं।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि कंपनी की यौन उत्पीड़न रोकथाम (पॉस्को) समिति में स्थानीय सदस्यों को शामिल करने की आवश्यकता है, ताकि transparency बढ़े और जांच अधिक प्रभावी हो।
अधिकारी ने सुझाव दिया कि वीडियो कान्फ्रेंस पर निर्भरता के बजाय आमने-सामने की बैठकें आयोजित की जाएं, ताकि direct interaction हो और workplace safety सुनिश्चित हो। निदा खान की भूमिका अब तक की जांच में एक केंद्रीय बिंदु बनी हुई है।
इस तरह के workplace abuse कार्यस्थल दुर्व्यवहार के मामले अक्सर छिप जाते हैं, लेकिन यहां जांच तेजी से हो रही है।
एक आईटी कंपनी में forced conversion जबरन मतांतरण का आरोप? यह सचमुच चौंकाने वाला है।
अगर कंपनी की आंतरिक समितियां वास्तविक accountability जवाबदेही नहीं दिखातीं, तो ऐसे मामले बढ़ेंगे।
काम की जगह पर धर्म पर दबाव? यह mental pressure मानसिक दबाव बर्दाश्त करने वाले कर्मचारी को कौन सुनेगा?
अदालत ने जमानत से इनकार किया, जो दिखाता है कि सबूत काफी serious गंभीर हैं।
टीसीएस जैसी बड़ी कंपनी में ऐसा होना उनकी internal controls आंतरिक नियंत्रण प्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।
फरार आरोपित? उसे जल्द से जल्द पकड़ा जाना चाहिए ताकि justice न्याय मिल सके।