MCC का उल्लंघन है PM का राष्ट्र के नाम संबोधन, CEC से मांगी गई कार्रवाई; 700 पूर्व नौकरशाहों, शिक्षाविदों की चिट्ठी

प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन पर विवाद छिड़ गया है, क्योंकि 700 से अधिक पूर्व नौकरशाहों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन बताया है। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लिखे गए एक पत्र में आरोप लगाया है कि 18 अप्रैल को किया गया यह संबोधन, जो दूरदर्शन, संसद टीवी और आकाशवाणी पर प्रसारित हुआ, वास्तव में एक election campaign के रूप में काम कर रहा था।

इस समय असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में the MCC लागू है। असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को चुनाव हुए, जबकि तमिलनाडु में 23 अप्रैल और पश्चिम बंगाल में 23 व 29 अप्रैल को मतदान होना है। मतगणना 4 मई को होगी। इस पृष्ठभूमि में, आयोग के नियमों के तहत मंत्रियों को आधिकारिक कार्यों का उपयोग partisan purposes के लिए करने से मना किया गया है।

हस्ताक्षरकर्ताओं का तर्क है कि सरकार के वित्त पोषण वाले मीडिया का उपयोग करके प्रसारित किया गया यह संबोधन सत्तारूढ़ पार्टी को unfair advantage पहुँचाता है। इससे चुनावों में समान अवसर के सिद्धांत की हानि होती है, जो लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है।

पत्र में चुनाव आयोग से take action करने और संबोधन की सामग्री तथा तौर-तरीके की जांच करने का आग्रह किया गया है। यदि प्रसारण के लिए पहले से अनुमति थी, तो अन्य राजनीतिक दलों को भी सार्वजनिक मंचों पर समान समय दिए जाने की मांग की गई है।

हस्ताक्षरकर्ताओं में पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, अर्थशास्त्री जयति घोष, संगीतकार टी एम कृष्णा, पत्रकार पी. गुहा ठाकुरता और भाकपा नेता एनी राजा के साथ-साथ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति पी. प्रभाकर भी शामिल हैं। उन्होंने आयोग से चुनाव integrity बनाए रखने के लिए त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

प्रतिक्रियाएँ 7

  • रवि_चौधरी

    सरकारी मीडिया का इस्तेमाल unfair advantage देता है, ये बात साफ है। लेकिन क्या आयोग वाकई कुछ कर पाएगा?

  • प्रियंका_एम

    हर बार यही होता है। सत्ता में वाले rule भी करते हैं और चुनाव भी।

  • निरंजन

    आचार संहिता के दौरान ये सब बर्दाश्त नहीं होना चाहिए। integrity बनाए रखना जरूरी है।

  • सुधा_कश्यप

    700 लोगों ने हस्ताक्षर किए? ये कोई छोटी बात नहीं है।

  • अमित_जोशी

    सरकार को public resources का इस्तेमाल चुनावी फायदे के लिए नहीं करना चाहिए।

  • विकास_मल्होत्रा

    ये सिर्फ एक संबोधन नहीं है, ये political messaging है।

  • लीला_देवी

    आयोग को take action करनी चाहिए, नहीं तो आचार संहिता का मतलब ही खत्म हो जाएगा।

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

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