कौन है बीता हेम्मती, जिसे ईरान में मौत की सजा दी जा रही है
ईरान की न्यायपालिका ने बीता हेम्मती को death penalty सुनाई है, जो जनवरी 2026 में देश विरोधी protests में भाग लेने के आरोप में दोषी पाई गईं। हेम्मती पर विस्फोटकों का इस्तेमाल करने, हिंसक विरोध-प्रदर्शनों में शामिल होने और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए threat पैदा करने का आरोप है। अगर सजा अमल में आती है, तो वह विरोध-प्रदर्शनों में कथित भागीदारी के कारण execution पर चढ़ने वाली पहली महिला बन जाएंगी।
नेशनल काउंसिल ऑफ रेजिस्टेंस ऑफ ईरान (NCRI) के अनुसार, अदालत ने हेम्मती, उनके पति मोहम्मदरेज मजीद अस्ल और दो अन्य लोगों को हिंसक demonstrations को भड़काने, हथियारों का उपयोग करने और सुरक्षाबलों पर ज्वलनशील पदार्थ फेंकने के लिए दोषी ठहराया है। अधिकारियों का आरोप है कि इन लोगों ने foreign powers के इशारे पर ईरान में अशांति फैलाई और राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनौती दी।
यह मामला उन व्यापक हिंसक प्रदर्शनों के सिलसिले में आता है जो दिसंबर 2025 में तेहरान में दुकानदारों और व्यापारियों की strike से शुरू हुए थे। यह आंदोलन धीरे-धीरे छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं तक फैल गया और कई शहरों में आगजनी व तोड़फोड़ का रूप ले लिया। सुरक्षाबलों ने बल का उपयोग करते हुए 10,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया।
संगठन टुगेदर अंगेस्ट द डेथ पेनल्टी के अनुसार, 2025 में ईरान में 1,600 से अधिक लोगों को hanged दी गई, जिनमें 48 महिलाएं भी शामिल थीं। यह आंकड़ा अंतरराष्ट्रीय criticism का कारण बना है, और मानवाधिकार समूह ईरान पर सजा के त्वरित उपयोग और न्यायिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता के अभाव को लेकर concern जता रहे हैं। बीता हेम्मती का मामला इसी संदर्भ में एक कड़वा उदाहरण बन रहा है।
एक महिला को फांसी की सजा सुनाना अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के खिलाफ है। क्या वाकई उसके पास fair trial न्यायिक सुनवाई का मौका था?
ईरान सरकार हमेशा 'विदेशी हस्तक्षेप' की बात करती है। लेकिन क्या आंतरिक dissatisfaction असंतोष को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा?
2025 में 1600 फांसियां? यह कितना extreme चरम है। क्या यह न्याय है या डराने का तरीका?
बीता हेम्मती के मामले में जो आरोप लगे हैं, वे गंभीर हैं, लेकिन due process कानूनी प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है।
इतनी सजाएं सुनाना सिर्फ विरोध को दबाने का तरीका लगता है। यह suppress दबाव लंबे समय तक काम नहीं आएगा।
हड़ताल से शुरू हुआ आंदोलन जब हिंसक हो जाता है, तो स्थिति बिगड़ती है। लेकिन आनुपातिकता कहां गई?