US-IRAN वार्ता: खुशी में फूले नहीं समा रहे थे आसिम मुनीर, ट्रंप ने एक झटके में बता दी हैसियत
अमेरिका और ईरान के बीच talks की तैयारी के बीच पाकिस्तान ने अपनी सुरक्षा तैयारियों को highest level तक ले जाकर खुद को एक वैश्विक mediator के रूप में पेश करने की कोशिश की थी। पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस घटना में अंतरराष्ट्रीय सम्मान हासिल करने की उम्मीद में excited थे। उन्होंने इस्लामाबाद में full control स्थापित कर दिया था: स्कूल बंद, सड़कों पर पुलिस की भारी तैनाती, और फाइव-स्टार hotels रातों-रात खाली कराए गए।
लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक झटके में इस पूरे plan को ध्वस्त कर दिया। उन्होंने घोषणा की कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान नहीं आएंगे, क्योंकि उनकी security को serious risk है। यह घोषणा न केवल एक तकनीकी रद्दीकरण थी, बल्कि एक जानबूझकर कूटनीतिक snub मानी जा रही है। अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने 24 घंटे के नोटिस पर जिम्मा लेने से इनकार कर दिया, जो वास्तव में पाकिस्तान की स्थानीय security setup पर भरोसा न होने का संकेत है।
इसका मतलब है कि चाहे पाकिस्तान कितनी भी भारी तैनाती कर ले, अमेरिका उसे unstable और unreliable मानता है। इतिहास ने इस छवि को मजबूत किया है — ओसामा बिन लादेन का वर्षों तक अबॉटाबाद में छिपे रहना, सैन्य ठिकानों के पास ही, इसका सबूत है। अमेरिका के लिए अपने vice president , अर्थात 'नंबर टू' नेता, को एक ऐसे देश में भेजना जहां internal threats स्थायी हैं, बहुत बड़ा political risk होगा।
पाकिस्तान का सपना था कि वह अमेरिका और ईरान जैसे दुश्मनों को एक मेज पर बैठाकर अपनी global role को मजबूत करेगा। लेकिन अब दुनिया यह देख रही है कि वही देश जहां अमेरिका का उपराष्ट्रपति जाने से hesitates है, वह शांति कैसे कराएगा। यह न केवल एक diplomatic embarrassment है, बल्कि एक साफ संदेश भी है: प्रतिष्ठा केवल तैयारियों से नहीं बनती, बल्कि अंतरराष्ट्रीय trust से बनती है।
इस घटना ने पाकिस्तान की भू-राजनीतिक position को लेकर गहरी चिंता भी जगाई है। क्या वह वास्तव में एक विश्वसनीय negotiation मंच बन सकता है? क्या अन्य राष्ट्र अब भी उस पर भरोसा करेंगे? जब तक पाकिस्तान अपने internal security ढांचे में गहरे सुधार नहीं करता, ऐसे international events उसके लिए नाकामयाबी का प्रतीक बनते रहेंगे।
अगर अमेरिका को भरोसा नहीं है, तो पूरे शहर को बंद करने से क्या फायदा? security trust सुरक्षा पर विश्वास तो सिस्टम से आता है, नाटक से नहीं।
ट्रंप का बयान एक साफ भू-राजनीतिक संकेत है — पाकिस्तान अब कोई भरोसेमंद हस्ती नहीं।
पाकिस्तान बार-बार इस तरह की public humiliation जनतक अपमान झेल क्यों रहा है? क्या सेना को इसका जवाब देना चाहिए?
ये सब सुरक्षा बहाना है। असली वजह ये है कि अमेरिका पाकिस्तान को strategic value रणनीतिक महत्व नहीं देता।
पाकिस्तान को अब real reform वास्तविक सुधार करने पड़ेंगे, नाटकीय पीआर के नाटक नहीं।
आसिम मुनीर ने इतना बड़ा दांव क्यों लगाया? क्या उन्हें पता नहीं था कि अमेरिका takes risks जोखिम लेने को तैयार नहीं है?
इस्लामाबाद में जनता को स्कूल और काम से रोका गया, बस एक failed diplomacy असफल कूटनीति के लिए। कितनी बेकार की तैयारी!
पाकिस्तान के लिए ये wakeup call जाग जाओ का संदेश होना चाहिए। वैश्विक प्रतिष्ठा एक दिन में नहीं बनती।