बिहार में राजस्व कर्मचारियों के निलंबन वापसी पर विभाग का बड़ा बयान, विजय सिन्हा का नाम साफ़ किया गया
बिहार में राजस्व विभाग ने हड़ताल के दौरान employees को निलंबित करने के मामले में एक महत्वपूर्ण clarification दिया है। अब यह तय हो गया है कि निलंबन वापस लेने का decision जिला स्तर पर ही होगा, जो स्थानीय administration को अधिक स्वायत्तता देता है।
विभाग के अपर सचिव डॉ. महेंद्र पाल ने 13 अप्रैल को district magistrates को पत्र लिखकर इस बात को औपचारिक रूप दिया। उन्होंने कहा कि 11 फरवरी से 19 अप्रैल 2026 के बीच की गई disciplinary action विभागीय दिशानिर्देशों के तहत थी, और जिला authorities द्वारा लागू की गई थी।
एक बड़ी राजनीतिक controversy के बीच, विभाग ने स्पष्ट किया कि तत्कालीन उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने किसी भी स्तर पर direct order जारी नहीं किए। यह बयान उनकी involvement को लेकर उठे सवालों के बीच आया है।
इसके साथ ही, जिलों में निलंबन वापस लेने की process शुरू हो गई है। बिहार राजस्व कर्मचारी संवर्ग नियमावली 2025 के अनुसार, नियुक्ति और अनुशासनिक कार्रवाई का authority समाहर्ताओं को है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह निर्णय केंद्रीकृत नहीं था, बल्कि local control के दायरे में आता था।
ये सब तो बाद की बातें हैं, असली सवाल ये है कि क्या कर्मचारियों को fair treatment न्याय मिलेगा?
विजय सिन्हा ने नहीं दिया ऑर्डर? लेकिन जिलेदार क्यों इतनी swift action त्वरित कार्रवाई करते, अगर ऊपर से pressure दबाव नहीं था?
निलंबन वापसी की प्रक्रिया शुरू होना अच्छी बात है, लेकिन क्या trust विश्वास बहाल हो पाएगा?
हर बार हड़ताल पर निलंबन, फिर वापसी — क्या यही cycle चक्र चलता रहेगा?
जिला स्तर को power शक्ति देना ठीक है, लेकिन क्या सभी जिलों में consistent decision एक जैसा निर्णय होगा?
अब तक के हर बयान में नुकसान कम करने की कोशिश झलकती है।
कर्मचारी तो जूझ रहे हैं, लेकिन वास्तविक जवाबदेही कहाँ है?