विजय कुमार सिन्हा की सुरक्षा घटाई गई, निशांत कुमार को Z और श्रवण को मिली Y प्लस सुरक्षा
बिहार सरकार ने उपमुख्यमंत्री पद से हटाए गए विजय कुमार सिन्हा की सुरक्षा को कम कर दिया है। पहले high-level security वाले सिन्हा को अब Z प्लस के बजाय Z श्रेणी की सुरक्षा मिलेगी। गृह विभाग ने इस फैसले को लेकर आधिकारिक चिट्ठी जारी की है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि राज्य सुरक्षा समिति की recommendation पर यह decision लिया गया है। इस बदलाव ने न केवल सिन्हा की political status पर सवाल खड़ा किया है, बल्कि सत्ता के बदलाव के तुरंत बाद security downgrade की प्रक्रिया पर भी चर्चा छेड़ दी है।
इसी बीच, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने नए उपमुख्यमंत्रियों विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव को तुरंत Z श्रेणी की सुरक्षा प्रदान कर दी है। यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि सरकार अब नई power structure को ठोस आधार दे रही है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को भी पहली बार Z सुरक्षा दी गई है, जो उनके rising profile को दर्शाता है। निशांत कुमार पहले जदयू के ordinary member थे, लेकिन अब उनकी राजनीतिक गतिविधियों को गंभीरता से लिया जा रहा है।
एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि नीतीश कुमार के करीबी रहे श्रवण कुमार को Y प्लस सुरक्षा दी गई है, जबकि वे फिलहाल किसी public office पर नहीं हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार loyalty और निजी political calculation के आधार पर भी सुरक्षा आवंटित कर रही है। यह नीति पहले के उन मानकों से अलग है, जहां सुरक्षा अक्सर पद या खुली धमकी के आधार पर दी जाती थी।
सुरक्षा आवंटन में यह तेजी से बदलाव न केवल व्यक्तिगत prestige का मामला है, बल्कि एक संकेत भी है कि किसे सत्ता में कितना influence माना जा रहा है। विजय कुमार सिन्हा के साथ हुआ बदलाव उनके राजनीतिक isolation को बढ़ा सकता है, जबकि निशांत और श्रवण को सुरक्षा मिलना उनके समूह के भीतर confidence को मजबूत करेगा। ऐसे में, सुरक्षा अब केवल protection नहीं, बल्कि political signal भी बन गई है।
जब तक पद है, तब तक सुरक्षा और ताकत। अब सिन्हा की political relevance राजनीतिक प्रासंगिकता कम होगी।
निशांत कुमार को Z सुरक्षा? यह स्पष्ट है कि यहां nepotism परिवारवाद चल रहा है, न कि खतरे का आकलन।
श्रवण कुमार को बिना पद के Y प्लस मिला? तो फिर दूसरे वफादार नेताओं को क्यों नहीं? favoritism पक्षपात साफ दिख रहा है।
सरकार के पैसे से इतने security personnel सुरक्षाकर्मी लगे हैं। क्या यह सब public money जनता के पैसे का सही उपयोग है?
एक बार उपमुख्यमंत्री, अब साधारण Z सुरक्षा। यह बदलाव humiliation अपमान जैसा लगता है।
देखिए, सुरक्षा अब सिर्फ खतरे का मामला नहीं रहा। यह वास्तविक समय का सूत्र बन गया है कि कौन चढ़ रहा है और कौन गिर रहा है।