इजरायल के साथ सीजफायर कमजोरी नहीं, हमारी संप्रभुता है: लेबनानी राष्ट्रपति
इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिन के ceasefire के ऐलान के बाद मध्य पूर्व में शांति की उम्मीद जगी है। भारी बमबारी के बाद हुए इस समझौते में अमेरिका की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जहाँ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ बातचीत के बाद कहा कि इजरायल अब लेबनान पर आक्रामक military action नहीं करेगा। वॉशिंगटन में 34 साल बाद दोनों देशों के प्रतिनिधियों की बैठक ने इस प्रक्रिया को और मजबूती दी।
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ ऑन ने शुक्रवार को इस सीजफायर के बाद पहली बार जनता को संबोधित करते हुए कहा कि यह कदम उनके देश की sovereignty के खिलाफ नहीं, बल्कि उसके बचाव में है। उन्होंने कहा कि decision लेबनान खुद लेगा और वे चाहते हैं कि उनका देश आत्म-विनाश की बजाय prosperity की ओर बढ़े।
राष्ट्रपति ऑन ने उत्तरी इजरायल पर हिजबुल्लाह द्वारा किए गए रॉकेट हमलों की condemnation की, जिन्होंने हालिया संघर्ष की शुरुआत की थी। उन्होंने ईरान पर भी दबाव बनाया, जिसे वे हिजबुल्लाह को हथियार और support देने के लिए जिम्मेदार मानते हैं। उनका कहना था कि लेबनान की नीति किसी बाहरी शक्ति या उसके सहयोगियों द्वारा नहीं तय की जाएगी।
हिजबुल्लाह के उस दावे का जवाब देते हुए कि बेरूत के पास इजरायल के साथ सीधी बातचीत का अधिकार नहीं है, राष्ट्रपति ने साफ किया कि लेबनान के independent decisions उनकी संप्रभुता का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि वे किसी भी compromise के लिए तैयार नहीं हैं जो देश की संप्रभुता के सिद्धांत को कमजोर करे।
इस बीच, अमेरिका ने स्पष्ट किया कि ट्रंप द्वारा घोषित रोक केवल आक्रामक कार्रवाइयों पर लागू होगी, न कि आत्मरक्षा में किए गए response पर। समझौते के अनुसार, इजरायल को लेबनान में आक्रामकता से बचना है, लेकिन यदि हिजबुल्लाह फिर से कार्रवाई करता है, तो इजरायल के पास जवाब देने का right बरकरार है।
अगर आत्मरक्षा का right अधिकार बरकरार है, तो यह सीजफायर कितने दिन चलेगा? हर एक्शन को आत्मरक्षा में जारी किया जा सकता है।
लेबनान की sovereignty संप्रभुता की बात तो अच्छी लगती है, लेकिन क्या वाकई वे ईरान और हिजबुल्लाह के दबाव में नहीं हैं?
अमेरिका बार-बार क्यों बीच में आता है? क्या वे वाकई शांति चाहते हैं या बस अपनी influence प्रभावशीलता बनाए रखना चाहते हैं?
हिजबुल्लाह ने जो कहा, उसका जवाब राष्ट्रपति ने बहुत clear स्पष्ट तरीके से दिया। लेबनान की आवाज सुनाई दे रही है।
क्या इस ceasefire युद्धविराम के बाद वापस आए विस्थापित लोगों को ठीक से सहायता मिलेगी? यही असली चुनौती है।
सब बातें अच्छी लगती हैं, लेकिन जब तक support समर्थन देने वाले राज्य नहीं रुकते, संघर्ष क्यों रुकेगा?